US-Israel और Iran की जंग में आया नया मोड़, अमेरिका और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर असर.

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने छठे महीने में प्रवेश कर गया है। इस लंबी खींचतान और हमलों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अब किसी बड़े बदलाव या तेहरान में सरकार के पतन की ओर नहीं, बल्कि एक लंबी अनिश्चितता और ठहराव की स्थिति की तरफ बढ़ रहा है। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट के एचए हेल्लीर ने यह जानकारी दी है कि ईरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन निकट भविष्य में वहां की सरकार गिरने की कोई उम्मीद नहीं है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस पूरी स्थिति को अमेरिका के साथ एक पूर्ण युद्ध करार दिया है। इस तनातनी का असर खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के देशों की अर्थव्यवस्था पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, जिससे निपटने के लिए सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देश अपनी पुरानी नीतियों को बदलकर नए आर्थिक रास्तों पर तेजी से काम कर रहे हैं।
खाड़ी देशों में क्षेत्रीय साझेदारी और वैकल्पिक रास्तों की तलाश
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा और व्यापार के लिए अमेरिका पर निर्भरता कम करने की जरूरत महसूस हो रही है। ओमान, इराक, सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देश अब आपसी क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करने में लगे हुए हैं। विशेषकर इराक की 1,200 किलोमीटर लंबी डेवलपमेंट रोड परियोजना अब बहुत खास बन गई है, जो ग्रांड फौ पोर्ट को तुर्किए से जोड़ती है। यह सड़क मार्ग फारस की खाड़ी के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे व्यापारिक गतिविधियां सुरक्षित रह सकें। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इस सिलसिले में 27 अगस्त 2026 को तेहरान का दौरा किया था ताकि समुद्र में जहाजों की आवाजाही को फिर से पूरी तरह सुरक्षित और स्वतंत्र किया जा सके।
समुद्री रास्तों की सुरक्षा और ईरान के हालात
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने बताया है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिलहाल जहाजों के आने-जाने के लिए एक गलियारा अस्थायी तौर पर खोल दिया है। हालांकि, भविष्य में यह रास्ता खुला रहेगा या नहीं, यह अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत और गाजा तथा लेबनान में शांति की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसके उलट, यूएस सेंट्रल कमांड के एडमिरल ब्रैड कूपर ने यह पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को साफ कर दिया है और सुरक्षित रास्ते बनाए रखने के लिए अब तक 1,500 कमर्शियल जहाजों की मदद की है। इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट 29-30 अगस्त 2026 को नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। वहां वह दुनिया के बड़े देशों से कहेंगे कि वे ईरान के साथ अपने बचे-कुचे व्यापारिक रिश्ते भी पूरी तरह खत्म कर दें।
अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेंगे, उन पर अमेरिका की तरफ से कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और उन्हें पश्चिमी देशों की डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से दूर किया जा सकता है। वैसे तो जून 2026 में हुए एक समझौते के बाद इस युद्ध की तीव्रता में कुछ कमी आई थी, लेकिन जुलाई में ईरान द्वारा कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद वह समझौता टूट गया। इस वजह से पूरा खाड़ी क्षेत्र एक बार फिर तनाव और सैन्य टकराव के साए में जीने को मजबूर है, जिसका सीधा असर वहां रहने वाले आम नागरिकों और कामगारों पर भी पड़ रहा है।