ईरान संघर्ष से अमेरिका को बड़ा झटका, पेंटागन की रिपोर्ट में खाड़ी देशों में सैन्य नुकसान का खुलासा

Praggya Singh sabal15 September 20263 min read22 viewsWorld
ईरान संघर्ष से अमेरिका को बड़ा झटका, पेंटागन की रिपोर्ट में खाड़ी देशों में सैन्य नुकसान का खुलासा

ईरान के साथ लंबे समय तक चले सीधे सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका को भारी सैन्य और ढांचागत नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी सरकार की एक नई निगरानी रिपोर्ट सामने आई है जिसके अनुसार ईरानी हमलों से पश्चिम एशिया के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी क्षति पहुंची है। इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना के जरूरी गोला-बारूद और आधुनिक मिसाइल इंटरसेप्टर के भंडार में भी भारी कमी दर्ज की गई है।

पेंटागन की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

ईरान सरकार की अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी तथा अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की रिपोर्ट में 28 फरवरी से 30 जून तक की स्थिति का आकलन किया गया है। इस रिपोर्ट को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम, विदेश विभाग और यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालयों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के हमलों से कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है।

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ईरान के इन हमलों में मिसाइल डिफेंस रडार सिस्टम समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए। रिपोर्ट में दर्जनों अमेरिकी विमानों और ड्रोन के क्षतिग्रस्त होने या नष्ट होने का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। सबसे बड़ा संकट अमेरिकी हथियारों के भंडार को लेकर सामने आया है। रिपोर्ट में माना गया है कि संघर्ष के दौरान अमेरिका के जरूरी गोला-बारूद के स्टॉक में भारी गिरावट आई है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुमानों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आधुनिक मिसाइलों और इंटरसेप्टर के भंडार को युद्ध से पहले के स्तर तक वापस लाने में अमेरिकी रक्षा उद्योग को करीब तीन साल तक का समय लग सकता है।

सैन्य संचालन के तरीके में करने पड़े बड़े बदलाव

ईरानी और सहयोगी ताकतों के हमलों के बाद सेंटकॉम को क्षेत्र में अमेरिकी सेना के संचालन के तरीकों में बड़े बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा। अमेरिकी कमांड ने कई जगहों से अपने कर्मियों, सैन्य संपत्तियों और स्टोरेज सुविधाओं को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। इसी बदलाव के तहत इराक और कुवैत से मेडिकल इवैक्यूएशन हेलीकॉप्टर भी हटाए गए, जिसके बाद घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए ज्यादातर मामलों में केवल जमीनी मार्ग का ही इस्तेमाल करना पड़ा।

बहरीन में अमेरिकी नौसेना के क्षेत्रीय केंद्र को हुए नुकसान के कारण अमेरिकी सेना के लिए पर्याप्त नौसैनिक अड्डे और सपोर्ट पोर्ट उपलब्ध कराना काफी मुश्किल हो गया। इसके बाद अमेरिका को हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया को अपने समुद्री लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर इस्तेमाल करना पड़ा। इस बदलाव की वजह से सैन्य सामान की दोबारा आपूर्ति का समय बढ़कर सीधे 14 से 18 दिन हो गया, जिससे अमेरिकी सैन्य तंत्र की रफ्तार काफी धीमी हो गई.

राजनयिक ठिकानों को भी करोड़ों का नुकसान

इस संघर्ष के दौरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी राजनयिक सुविधाओं को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। ईरानी जवाबी हमलों से अमेरिकी राजनयिक ठिकानों को लगभग 18.4 करोड़ डॉलर का कुल नुकसान हुआ। अकेले इराक में अमेरिकी ठिकानों पर 600 से अधिक हमलों का उल्लेख किया गया है, जिनसे करीब 15.7 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ। इराक अमेरिकी राजनयिक नुकसान के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावित स्थान साबित हुआ।

मार्च की शुरुआत में रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर को भी एक ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा था। इसके अलावा दुबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की एक यूटिलिटी बिल्डिंग भी ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुई। सुरक्षा कारणों से 23 फरवरी से 30 जून के बीच करीब 3,500 अमेरिकी राजनयिक कर्मचारी पश्चिम एशिया क्षेत्र से बाहर रहे। बहरीन, इराक, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और यूएई से गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को तुरंत वापस बुलाने के आदेश भी दिए गए थे, और कई मिशन केवल सीमित कर्मचारियों के साथ ही काम कर रहे थे।

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