नेपाल में भयानक बाढ़ का कहर, अमेरिका ने की 36 लाख डॉलर की मदद का ऐलान

Sushma Kumari29 August 20264 min read20 viewsWorld
नेपाल में भयानक बाढ़ का कहर, अमेरिका ने की 36 लाख डॉलर की मदद का ऐलान

अमेरिका ने नेपाल में आए भयंकर संकट के बीच मदद का बड़ा हाथ बढ़ाया है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को नेपाल के लिए $3.6 मिलियन यानी करीब 36 लाख डॉलर के मानवीय सहायता पैकेज का ऐलान किया है। यह कदम देश में आए उस विनाशकारी बाढ़ के बाद उठाया गया है जो बुधवार, 26 अगस्त 2026 को ग्लेशियर के टूटने की वजह से आई थी। इस आपदा ने नेपाल और तिब्बत के इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग मदद के लिए तरस रहे हैं।

खाद्य सहायता और पहले दी गई मदद का ब्योरा

इस नई अमेरिकी मदद के तहत प्रभावित परिवारों को अगले तीन महीने तक का जरूरी राशन दिया जाएगा। इससे लगभग 10,000 परिवारों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचेगा जो इस आपदा में बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को यूएस अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पॉलिटिकल अफेयर्स Allison M. Hooker ने $500,000 की आपातकालीन सहायता देने की घोषणा की थी। इस राशि का इस्तेमाल लोगों के रहने के लिए अस्थायी आश्रय, जरूरी राहत सामग्री और साफ-सफाई तथा पीने के पानी यानी WASH सुविधाओं के लिए किया जा रहा है, जिसमें Catholic Relief Services जैसे संगठनों की मदद ली जा रही है।

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बढ़ता मौत का आंकड़ा और लापता लोगों की तलाश

नेपाल और तिब्बत में आई इस भयानक आपदा के बाद से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक दोनों जगहों को मिलाकर कुल 676 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें अकेले नेपाल से 2,426 और तिब्बत से 554 लोग शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन लापता लोगों में 90 अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं, हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी अमेरिकी नागरिक की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल सरकार और सेना के बचाव अभियानों के तहत अब तक कुल 3,700 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

विदेशी नागरिकों का रेस्क्यू और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

संकट की इस घड़ी में नेपाल की सेना ने अब तक कुल 163 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित उनके वतन या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। इनमें 113 भारतीय, 26 चीनी, 15 दक्षिण कोरियाई, चार जर्मन, दो इतालवी, दो अमेरिकी और एक ओमान का नागरिक शामिल है। नेपाल के वित्त मंत्री Swarnim Wagle ने जानकारी दी है कि देश को पूरी तरह से दोबारा खड़ा करने और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए $4 बिलियन से $5 बिलियन की भारी-भरकम रकम की जरूरत होगी। वहीं, विदेश मंत्री Shisir Khanal ने कहा है कि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों से विशेष तकनीकी मदद की बहुत आवश्यकता है ताकि सुरंगों को साफ किया जा सके, टूटी सड़कों और पुलों को ठीक किया जा सके और मृतकों की पहचान के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा सके। स्थिति से निपटने के लिए चीन से पांच सुरंग विशेषज्ञों की टीम को पहले ही एक हाइड्रोपावर स्टेशन पर तैनात कर दिया गया है जहां कुछ मजदूरों के फंसे होने की आशंका है।

राहत कार्यों में आ रही बाधाएं और मौसम का हाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल की मदद के लिए कई देश आगे आ रहे हैं। ग्रेट ब्रिटेन ने $6.8 मिलियन, यूरोपीय संघ यानी EU ने $2.3 मिलियन की मदद का वादा किया है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने आपातकालीन मेडिकल सप्लाई नेपाल भेज दी है। इसके अलावा, भारत ने भी 57 मीट्रिक टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई है और आने वाले दिनों में जापान तथा ऑस्ट्रेलिया से भी सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन तमाम कोशिशों के बावजूद भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से टूटी सड़कों और पुलों के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल के मौसम विभाग ने शुक्रवार, 29 अगस्त 2026 को एक बार फिर से ताजा बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी जारी कर दी है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

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