US का बड़ा ऐलान, ईरान पर सैन्य कार्रवाई का खतरा बरकरार, नए प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था हुई तहस-नहस

संयुक्त राज्य अमेरिका के Secretary of War Pete Hegseth ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को यह स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के खिलाफ सैन्य ताकत के इस्तेमाल के विकल्प को अभी तक खारिज नहीं किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य या उसके आस-पास के इलाकों में सटीक हमले करने के रास्ते पर भी विचार किया जा सकता है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक US War Department वेबसाइट पर जा सकते हैं। इस बड़े बयान से पहले इस हफ्ते ईरान को दुनिया से अलग-थलग करने के लिए कड़े प्रतिबंधों की शुरुआत की गई है, जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'Operation Economic Outcast' या आर्थिक डी-डे का नाम दिया गया है।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़े प्रतिबंध
अमेरिकी Treasury Secretary Scott Bessent ने घोषणा की कि इन नए उपायों का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को मिलने वाली हर आर्थिक मदद को पूरी तरह से बंद करना है। इन प्रतिबंधों के दायरे में विदेशी संस्थाएं, डिजिटल संपत्तियां, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग सेक्टर को शामिल किया गया है। इन कड़े कदमों की वजह से ईरान की मुद्रा यानी ईरानी रियाल खुले बाजार में गिरकर प्रति अमेरिकी डॉलर 20 लाख रियाल के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। इन प्रतिबंधों के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप Official Biography Page देख सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन सभी प्रतिबंधों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान और कूटनीतिक हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह भी नोट किया कि यह संघर्ष अब अपने छह महीने पूरे होने के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इस स्थिति में एक बहुत बड़ी जीत हासिल कर रहा है और शांति वार्ताओं को फिर से शुरू करने के लिए फिलहाल कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने इस विश्वास को भी दोहराया कि ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei के निधन की खबरों के उलट वे मृत नहीं बल्कि बहुत गंभीर रूप से घायल हैं, हालांकि उनकी स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। इन बढ़ते तनावों के बीच, ईरान और रूस ने गैस सहयोग के मुद्दों पर आपस में बातचीत की है। वहीं दूसरी तरफ, रक्षा मंत्री हेगसेथ ने एक वीडियो जारी कर ऐसी रक्षा रणनीति पर जोर दिया है जो विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने का काम करती है। यह तमाम भू-राजनीतिक उथल-पुथल उस युद्ध के साए में चल रही है जिसमें इसी साल फरवरी 2026 में कई हमले हुए थे और जून के महीने में शांति समझौते की एक कोशिश भी नाकाम हो गई थी।