अमेरिका ने ईरान के लार्क द्वीप पर किया हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने की साजिश नाकाम

Sushma Kumari30 August 20262 min read31 viewsWorld
अमेरिका ने ईरान के लार्क द्वीप पर किया हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने की साजिश नाकाम

रविवार, 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के लार्क द्वीप पर एक बड़ा सैन्य हमला किया। जुलाई के अंत के बाद से ईरान पर यह पहला सीधा अमेरिकी हमला है, जिससे खाड़ी देशों में तनाव काफी बढ़ गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने अल जज़ीरा को जानकारी दी कि इस ऑपरेशन का मुख्य निशाना दो ईरानी लॉन्चर थे, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट दागने की तैयारी कर रहे थे। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है ताकि पानी के जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स ने की हमले की पुष्टि

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स यानी IRGC ने इस अमेरिकी हमले की बात स्वीकार की है और इसे 'अमेरिकी-जियोनिस्ट दुश्मन' की कायराना हरकत बताया है। ईरान के सरकारी मीडिया संस्थानों जैसे फार्स न्यूज़ और तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने द्वीप के पास कई धमाके होने की खबर दी। IRGC के अनुसार इस हमले में उनके कुछ सैनिकों और आम नागरिकों की जान गई है तथा कई लोग घायल भी हुए हैं। इस घटना के बाद ईरानी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से कड़ा बदला लेने और हमलावरों को इसकी सजा देने का ऐलान किया है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी

यह सैन्य कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले हफ्ते दी गई चेतावनी के बाद सामने आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय पानी से सभी बारूदी सुरंगों को पूरी तरह हटा दिया गया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर भविष्य में किसी भी जहाज या संगठन को इस रणनीतिक जलमार्ग में नई सुरंगें रखते हुए देखा गया, तो उसे तुरंत नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। अमेरिका इस क्षेत्र में लगातार निगरानी रख रहा है ताकि व्यापारिक जहाजों का आना-जाना बिना किसी रोक-टोक के जारी रहे।

क्षेत्रीय तनाव और प्रवासियों पर संभावित असर

अमेरिका पहले तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर चल रहा था, लेकिन इस ताज़ा सैन्य टकराव से जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीधी जंग का खतरा फिर से पैदा हो गया है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और कामगारों के लिए इस तरह के हालात हमेशा चिंता का विषय बनते हैं। हालांकि अभी तक तेल और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ते तनाव को देखते हुए हर कोई स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

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