UAE के बैंकों पर अमेरिका की कड़ी नजर, ईरान से जुड़े लेन-देन पर लगाए नए प्रतिबंध.

अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरान के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को दो नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इस सख्त कदम को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का नाम दिया गया है, जिसका मुख्य मकसद ईरान के आर्थिक रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जो लोग भी ईरान की मदद करेंगे, उन्हें ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम और अमेरिकी डॉलर से दूर कर दिया जाएगा। इस पूरी कार्रवाई से खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों और व्यापार से जुड़े लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में बैंकिंग सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ेगा।
बैंक Melli की दुबई ब्रांच और हांगकांग की कंपनी पर एक्शन
अमेरिकी प्रशासन की तरफ से जिन लोगों और कंपनियों को निशाना बनाया गया है, उनमें बैंक Melli की दुबई ब्रांच के मैनेजर रेजा मोहम्मद ताएदी का नाम शामिल है। इसके अलावा हांगकांग की एक कंपनी पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिसके ऊपर पहले से प्रतिबंधित ईरानी एक्सचेंज हाउस के लिए पैसे को इधर-उधर करने का गंभीर आरोप है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने कड़े शब्दों में मांग की है कि बैंक Melli की हर एक शाखा को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाना चाहिए, ताकि ईरान की वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
Banque Misr UAE को लेकर FinCEN का बड़ा कदम
इन प्रतिबंधों के साथ ही, ट्रेजरी के फाइनेंशियल क्राइम्स एनफोर्समेंट नेटवर्क यानी FinCEN ने एक नया नियम प्रस्तावित किया है। इस नियम के तहत अमेरिकी वित्तीय संस्थानों में Banque Misr UAE की कॉरेस्पोंडेंट बैंकिंग सुविधाओं को रद्द करने की बात कही गई है। जांच में यह बात सामने आई है कि इस यूएई स्थित बैंक ने जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ईरानी शैडो बैंकिंग नेटवर्क से जुड़ी 103 कंपनियों के लिए लगभग 1.8 अरब डॉलर की रकम प्रोसेस की थी। ऐसा आरोप है कि बैंक के ग्राहकों में ऐसी फ्रंट कंपनियां भी शामिल थीं, जिनका इस्तेमाल ईरान के रक्षा मंत्रालय और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जा रहा था। इस पूरी रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी आप US Treasury Press Release पर देख सकते हैं।
चीन का बयान और अंतरराष्ट्रीय राजनीति
यह पूरा घटनाक्रम उस बड़े आर्थिक फैसले के बाद सामने आया है, जिसे अमेरिकी सरकार ने 25 अगस्त 2026 को 'इकोनॉमिक डी-डे' के रूप में घोषित किया था और जिसमें करीब 60 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इन सब के बीच, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 28 अगस्त को साफ किया कि बीजिंग एकतरफा और अवैध प्रतिबंधों के खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान से जुड़े मुद्दों को सुलझाने का केवल एक ही सही रास्ता है और वह बातचीत व कूटनीति के जरिए ही संभव हो सकता है।