अमेरिका ने ईरान के खिलाफ उठाया सख्त कदम, यूएई और मिस्र के बैंकों पर लटकी तलवार.

अमेरिका के वित्त मंत्री Scott Bessent ने ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह घेरने के लिए एक नए अभियान का ऐलान किया है। इस अभियान का नाम Operation Economic Outcast रखा गया है, जिसकी शुरुआत 24 अगस्त 2026 को की गई थी। इस रणनीति के तहत अमेरिका दुनिया भर के वित्तीय संस्थानों पर यह दबाव बना रहा है कि वे तेहरान के साथ अपने सभी व्यापारिक रिश्ते खत्म कर लें। अमेरिकी प्रशासन का यह सख्त रुख आम लोगों और कारोबारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
अमेरिका की सख्त चेतावनी और वित्तीय हिंसा की बात
नॉर्थ कैरोलिना के एशविल में हुई जी20 बैठकों के दौरान अमेरिकी वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जरूरत पड़ने पर वित्तीय हिंसा का भी सहारा लिया जाएगा। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग हर हफ्ते नए सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बैंकों को डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह काटना है। इस नीति के तहत उन देशों को भी निशाना बनाया जा रहा है जो ईरान के साथ लगातार व्यापार कर रहे हैं, जिसमें चीन का नाम भी शामिल है। चीनी बाजारों पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनके लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं।
बान्क मिस्र की यूएई शाखाओं पर मंडराया खतरा
इस कड़ी कार्रवाई के दायरे में मिस्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक Banque Misr भी आ गया है, जिसकी संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में स्थित शाखाओं पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अमेरिकी जांच के मुताबिक, इस बैंक पर जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ईरान के गुप्त बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े 103 से अधिक निगमों के लिए लगभग 1.8 अरब डॉलर की राशि प्रोसेस करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 अगस्त 2026 को यूएई और मिस्र के केंद्रीय बैंकों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में दोनों देशों ने पुष्टि की कि वे बान्क मिस्र की यूएई शाखाओं के नियमों के पालन को लेकर आपस में पूरा तालमेल बैठा रहे हैं।
ईरान का विरोध और क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी
दूसरी ओर, ईरान के वित्त और आर्थिक मामलों के मंत्री Ali Madanizadeh ने इन सभी अमेरिकी कार्रवाइयों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका के ये प्रतिबंध अपने मकसद में कभी कामयाब नहीं होंगे। इस आर्थिक तनाव के बीच क्षेत्रीय सैन्य हालात भी काफी बिगड़ चुके हैं। ईरान ने 30 अगस्त 2026 को जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दाग दीं। यह हमला लारक द्वीप पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी अमेरिकी सरकार के US Treasury Department Press Release में दी गई है, जहां से स्थिति की पुष्टि होती है।