UAE में बैंक पर अमरीका का बड़ा एक्शन, ईरान के गुप्त लेन-देन का मामला आया सामने.

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में अमरीकी प्रशासन ने एक बड़े बैंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। अमरीकी वित्त विभाग ने मिस्र के बैंक Banque Misr की यूएई शाखाओं पर अरबों डॉलर के संदिग्ध लेन-देन में मदद करने का आरोप लगाया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से वित्तीय बाजार में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
अमरीकी वित्त विभाग का कड़ा कदम और फिनसेन का प्रस्ताव
दिनांक 28 अगस्त 2026 को अमरीकी वित्त विभाग ने यूएई स्थित इस बैंक पर शिकंजा कसा है। अमरीकी संस्था Financial Crimes Enforcement Network (FinCEN) ने एक औपचारिक नियम का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत इस बैंक की अमरीकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच को पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है। इस नियम पर अभी 30 दिन की सार्वजनिक टिप्पणी की अवधि तय की गई है। अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि बैंक ने नियमों का उल्लंघन किया है।
करोड़ों डॉलर के लेन-देन और ईरानी नेटवर्क का खुलासा
अमरीकी रिपोर्ट के अनुसार, Banque Misr UAE ने जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच लगभग 1.8 अरब डॉलर के लेन-देन को अंजाम दिया। यह रकम कुल 103 ऐसी कंपनियों के जरिए घुमाई गई, जिनके तार ईरान के गुप्त बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। अमरीकी सरकार का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, हथियारों की खरीद और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स जैसे संगठनों को फंड देने के लिए किया जा रहा था। इस संबंध में अधिक जानकारी आप US Treasury Official Website पर देख सकते हैं।
अमरीकी मंत्रियों और अधिकारियों के बयान
अमरीकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी संस्थान ईरान की मदद करेगा, उसे अमरीकी डॉलर और वैश्विक वित्तीय बाजार से बाहर कर दिया जाएगा। अमरीका ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए 24 अगस्त 2026 को एक नया अभियान शुरू किया था। इसी अभियान के तहत OFAC (Office of Foreign Assets Control) ने दुबई में ईरान के बैंक मेल्ली की शाखा के मैनेजर Reza Mohammad Taidi और हांगकांग की कंपनी Kameng Trading Limited पर भी प्रतिबंध लगा दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध और प्रतिक्रियाएं
अमरीका के इस कदम के बाद दुनिया भर से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए इन्हें "आर्थिक आतंकवाद" करार दिया है। इसके अलावा, चीन के अधिकारियों ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए इन एकतरफा उपायों को मानने से साफ इंकार कर दिया है। इसके बावजूद अमरीकी वित्त मंत्री ने कहा है कि उनका प्रशासन ईरान का समर्थन करने वाले किसी भी देश या संस्था को नहीं छोड़ेगा।