अमेरिका और फ्रांस का बड़ा कदम, ईरान को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में घेरने की तैयारी.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिका, यूके, फ्रांस और जर्मनी ने मिलकर इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इन देशों की कोशिश है कि अगले हफ्ते एक ऐसा प्रस्ताव पास किया जाए, जिससे ईरान को सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में रिपोर्ट किया जा सके। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कूटनीतिक चाल 5 सितंबर 2026 को सामने आई है, जो विएना में 7 सितंबर से 11 सितंबर 2026 तक होने वाली IAEA बोर्ड की नियमित बैठक से ठीक पहले की गई है। इस पूरी हलचल से मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है, जिसका असर वहां रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
यूरेनियम जांच और सैन्य हमलों का विवाद
यह पूरा मामला तब गरमाया जब ईरान ने IAEA के अधिकारियों को उन जगहों पर जाने से रोक दिया जहां यूरेनियम के निशान मिले थे। इसके अलावा, इजराइल और अमेरिका के सैन्य अभियानों में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु संयंत्रों के निरीक्षण की अनुमति भी ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को नहीं दी है। IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल मारियानो ग्रॉसी इस मामले पर 7 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। जो ड्राफ्ट प्रस्ताव अभी तैयार किया जा रहा है, उसके तहत डायरेक्टर जनरल से यह अनुरोध किया जाएगा कि वे अपनी खोजबीन की रिपोर्ट सभी IAEA सदस्य देशों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा को भेजें। अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो पिछले 20 सालों में यह पहला मौका होगा जब ईरान को इस तरह से सिक्योरिटी काउंसिल में रिपोर्ट किया जाएगा।
रूस और चीन की वीटो पावर और ईरान का पक्ष
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही यह प्रस्ताव पास हो जाए, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से किसी बड़े एक्शन की उम्मीद बहुत कम है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों रूस और चीन के पास वीटो पावर है, जो इस तरह के किसी भी कड़े फैसले को रोक सकते हैं। इससे पहले 12 जून 2025 को भी एक ऐसा ही प्रस्ताव आया था जिसमें ईरान को उसके परमाणु नियमों के उल्लंघन का दोषी माना गया था। उस समय भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य हमले किए गए थे। वर्तमान स्थिति यह है कि ईरान में यूरेनियम के 60% शुद्धता तक संवर्धन (enrichment) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। 2025 के सैन्य हमलों से पहले IAEA ने अनुमान लगाया था कि ईरान के पास इस शुद्धता स्तर का 440.9 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद था। हालांकि, ईरान लगातार यह कहता आ रहा है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु गैर-प्रसार संधि (Non-Proliferation Treaty) के नियमों का पालन करता है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जब तक IAEA सैन्य हमलों से प्रभावित जगहों के लिए कोई विशेष नियम या प्रोटोकॉल नहीं बनाती, तब तक निरीक्षकों को संवेदनशील साइटों पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी Reuters की रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है, जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।