अमेरिका ने ब्रिटेन के वेस्ट बैंक फैसले पर फेरा पानी, रुबियो बोले- प्रतिबंधों का हिस्सा नहीं बनेगा अमेरिका.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच बयानों का बड़ा अंतर देखने को मिला है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के व्यापार पर ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों में शामिल नहीं होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ब्रिटेन की ओर से उठाए गए कदमों को नहीं अपनाएगा।
ब्रिटेन और पश्चिमी देशों के कड़े कदम
मंगलवार को ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक की इजराइली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बड़ी घोषणा की थी। ब्रिटेन के अलावा फ्रांस और कनाडा ने भी इसी तरह के कड़े कदम उठाने का ऐलान किया था। ब्रिटिश सरकार ने इन बस्तियों के लगातार विस्तार और वहां दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हिंसा को देखते हुए यह सख्त रुख अपनाया था। ब्रिटेन की इस घोषणा के तुरंत बाद इजराइल की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और जवाबी कार्रवाई करते हुए यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने का बड़ा फैसला सुनाया गया।
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान और क्षेत्रीय चिंताएं
मियामी में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका स्पष्ट रूप से ब्रिटेन जैसा कदम नहीं उठाने जा रहा है। हालांकि, उन्होंने इस पूरे मामले पर ज्यादा विस्तार से बोलने से परहेज किया और कोई लंबी टिप्पणी नहीं की। इसके बावजूद उन्होंने वेस्ट बैंक के मौजूदा हालात पर अपनी गहरी चिंता जरूर जाहिर की। रुबियो ने कहा कि इस क्षेत्र में इस समय किसी भी तरह की अस्थिरता पैदा करने वाली स्थिति नहीं बननी चाहिए, क्योंकि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है और जरा सी लापरवाही हालात को और बिगाड़ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि वेस्ट बैंक के मुद्दे पर पश्चिमी देशों और अमेरिका की रणनीतिक सोच में फर्क साफ नजर आ रहा है। जहां एक तरफ ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा बस्तियों के खिलाफ खुलकर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं, वहीं अमेरिका इस मामले में बस्तियों के व्यापार प्रतिबंधों से दूरी बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की मूल रिपोर्ट देख सकते हैं।