अमेरिका और ईरान की जंग का असर, वॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट और क्रूड ऑयल के दाम बढ़े.

सोमवार, 31 अगस्त 2026 को अमेरिका के शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए। इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल यानी Crude Oil की कीमतों में अचानक आया बड़ा उछाल रहा, जिससे निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई। अमीरात समाचार एजेंसी (WAM) के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सैन्य हमलों की वजह से ऊर्जा की कीमतों में यह तेजी देखने को मिली है। बाजार पर आए इस दबाव की वजह से लोगों में महंगाई बढ़ने की आशंका फिर से पैदा हो गई है और सितंबर महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी काफी तेज हो गई हैं।
शेयर बाजारों का हाल और अमेरिकी-ईरान संघर्ष
सोमवार के कारोबार में Dow Jones Industrial Average में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह सूचकांक 374.09 अंक यानी 0.7 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर बंद हुआ। इसके अलावा, दूसरे बड़े शेयर बाजारों में भी भारी नुकसान देखा गया। S&P 500 इंडेक्स 25.62 अंक यानी 0.3 प्रतिशत फिसलकर 7,686.14 पर बंद हुआ। वहीं Nasdaq Composite भी 31.53 अंक यानी 0.1 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 26,370.89 पर आकर थम गया। इस पूरी गिरावट और बाजार के ताजा हालातों की विस्तृत जानकारी आप Emirates News Agency (WAM) की रिपोर्ट में देख सकते हैं।
सैन्य टकराव और कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव तब और बढ़ गया जब 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लारक द्वीप पर ईरान के दो रॉकेट लॉन्चरों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स (IRGC) के जवानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट लॉन्च करने और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी करते हुए देखा गया था। इसके जवाब में 31 अगस्त 2026 को ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस संघर्ष और तनाव के असर से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 2.7 प्रतिशत बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जिसने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को हिलाकर रख दिया।
ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख
महंगाई और इस नए भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर सबकी नजरें टिकी हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Kevin Warsh ने अपने जैक्सन होल भाषण में लगातार बनी हुई महंगाई पर चिंता जताई थी और कहा था कि लक्ष्य 2 प्रतिशत PCE inflation को हासिल करना है। सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के मुताबिक, सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा 25 बेसिस पॉइंट ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़कर 55.7 प्रतिशत हो गई है। जेपी मॉर्गन वेल्थ मैनेजमेंट के रणनीतिकार भी मानते हैं कि ईरान संघर्ष की वजह से सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों के चलते फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इससे उन लोगों पर भी असर पड़ सकता है जो ग्लोबल मार्केट और करेंसी पर नजर रखते हैं।