West Bank में इस्राइली सेना का बड़ा एक्शन, ताबड़तोड़ छापेमारी में कई घरों को बनाया सैन्य अड्डा.

इस्राइली सेना ने ऑक्यूपाइड West Bank में शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को तड़के सुबह से ही कई नए सैन्य ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। Wafa news agency और Al Jazeera English से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, इन छापों का दायरा काफी बड़ा था और सैनिकों ने कई इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया है। इस सैन्य कार्रवाई की वजह से आम नागरिकों की मुसीबतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और सुरक्षा के नाम पर सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है।
तुलकरम शरणार्थी शिविर पर लगातार घेराबंदी
Bethlehem के पश्चिम में स्थित al-Khader शहर में इस्राइली सैनिकों ने कई परिवारों के घरों में घुसकर तलाशी ली। वहीं दूसरी तरफ, Tulkarem शहर में भारी संख्या में सेना की तैनाती की गई जहाँ सैनिकों ने खुलेआम लाइव एम्युनिशन यानी गोलियों का इस्तेमाल किया और स्थानीय लोगों से पूछताछ की। तुलकरम शरणार्थी शिविर अभी भी कड़े पहरे और घेराबंदी के नीचे है। यह लगातार 590 दिन हो चुके हैं जब वहां सैन्य आक्रामकता जारी है। इस दौरान लोगों के घरों पर कब्जा करके उन्हें सेना के कैंप या बैरक में बदला जा रहा है, जिससे परिवार बेघर हो रहे हैं।
एक हफ्ते में सौ से ज्यादा लोगों को लिया हिरासत में
शुक्रवार की यह कार्रवाई 10 सितंबर 2026 को पूरे इलाके में हुई हिंसा की लहर के तुरंत बाद देखने को मिली है। Bethlehem में कम से कम 7 फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया, जिसमें पत्रकार Sabri Jibril और Rami Issam al-Amour भी शामिल हैं। Nablus में Faisal Street और Burqa गांव में छापेमारी के दौरान 10 लोगों को पकड़ा गया। इसके अलावा Hebron से कम से कम 5 और लोगों को हिरासत में लिया गया। Palestinian Prisoners' Society (PPS) के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में बच्चों, महिलाओं, पूर्व कैदियों और पत्रकारों समेत 100 से ज्यादा फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
यूएन ने दी घरों और बुनियादी ढांचे के विध्वंस की जानकारी
UN Deputy Spokesperson Farhan Haq ने बताया कि इस्राइली अधिकारियों ने मंगलवार और बुधवार को हुई कार्रवाई में 20 घरों और पानी के टैंक तथा सोलर पैनल जैसी जरूरी संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। यह घटनाएं तीन फिलिस्तीनी समुदायों में हुईं, जिसके कारण लगभग 60 लोग बेघर हो गए। इन विस्थापित हुए लोगों में आधे बच्चे शामिल हैं और इस विध्वंस से 30 अन्य लोग भी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। गाजा पट्टी में 7 अक्टूबर 2023 को युद्ध शुरू होने के बाद से इस तरह की दमनकारी नीतियां और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले लगातार तेज हुए हैं।