West Bank में बस्तियों के विस्तार से बढ़ा तनाव, मानसिक उपनिवेशवाद का डर.

वेस्ट बैंक क्षेत्र में इन दिनों हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि वहां लगातार मोबाइल आउटपोस्ट और बड़ी संख्या में इजरायली झंडे लगाए जा रहे हैं। खासकर जेनिन और नाबुलस के बीच के मुख्य रास्तों पर ये गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय लोगों के मन में अपनी ही जमीन पर बेगाना होने का डर पैदा हो गया है। 9 सितंबर 2026 तक सामने आई रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन सभी कोशिशों का मुख्य मकसद फिलिस्तीनी नागरिकों को उनके अपने ही इलाके में हाशिए पर धकेलना है ताकि वहां हमेशा के लिए कब्जा पक्का किया जा सके।
विशेषज्ञों और नेताओं के क्या हैं बयान
पैलेस्टाइन रिसर्च सेंटर के एक शोधकर्ता खलदौन अल-बरगौथी ने इस मामले पर बात करते हुए बताया कि ये सारी रणनीतियां फिलिस्तीनियों को उनकी ही जमीन पर सिर्फ एक अस्थायी मेहमान जैसा महसूस कराने के लिए रची जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, पैलेस्टाइन नेशनल इनिशिएटिव के महासचिव मुस्तफा बरगौथी ने 4 सितंबर 2026 को इस क्षेत्र में चल रही इजरायली सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से अभूतपूर्व बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के बस्तियों में रहने वाले लोग बिना किसी डर और रोक-टोक के अपनी मनमानी कर रहे हैं और उनका साफ मकसद जातीय सफाया करना है।
अधिकारियों की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून
इस बीच अमेरिकी प्रशासन के भारी दबाव के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक की लगभग 100 अनधिकृत चौकियों को हटाने का सख्त आदेश दिया है। इनमें से करीब 15 से 20 चौकियां ऐसी जगहों पर बनी हैं जिन्हें एरिया ए और बी के रूप में जाना जाता है। इस पूरे मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री को सबसे ज्यादा चिंता अमेरिका की उस बात को लेकर है जो एरिया बी के विकास से जुड़ी है, क्योंकि वहां नागरिक नियंत्रण फिलिस्तीनी प्राधिकरण के पास ही रहता है। नेतन्याहू ने अपने मंत्रियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे उन सैन्य कमांडरों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने से बचें जिन्हें इन चौकियों को हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अंतरराष्ट्रीय अदालत की राय और सुरक्षा हालात
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कब्जा की गई जमीन पर बनी सभी इजरायली बस्तियां और चौकियां अवैध मानी जाती हैं। इस बात पर मुहर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की उस सलाहकारी राय ने भी लगाई थी जो 19 जुलाई 2024 को आई थी, जिसमें गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक के कब्जे को गैरकानूनी करार दिया गया था। इसके बावजूद इजरायल केवल उन्हीं चौकियों को गैरकानूनी मानता है जिनके पास सरकार की विशेष मंजूरी नहीं होती है। दूसरी तरफ इजरायली सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा माहौल बहुत ज्यादा संवेदनशील और अस्थिर है। खुफिया रिपोर्टों से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में हमलों की योजनाएं और आतंकवाद विरोधी अभियान बढ़ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र और बद्दू अधिकारों के रक्षा संगठन जैसे अल-बेदार संगठन लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि बस्तियों की इन गतिविधियों से आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है और साथ ही सैन्य संसाधनों का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है।