दुनिया पर मंडराया बड़ा खतरा, समुद्री रास्तों में जंग के कारण करोड़ों लोगों के भूखे रहने की आशंका.

Sushma Kumari10 September 20263 min read43 viewsWorld
दुनिया पर मंडराया बड़ा खतरा, समुद्री रास्तों में जंग के कारण करोड़ों लोगों के भूखे रहने की आशंका.

दुनियाभर के गरीब देशों के लिए एक बेहद गंभीर और डराने वाली खबर सामने आई है। दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों की आपूर्ति करने वाले तीन मुख्य समुद्री रास्तों पर चल रही सैन्य लड़ाइयों की वजह से एक बहुत बड़ा संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था World Food Programme (WFP) ने एक चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि इस स्थिति के कारण दुनिया भर में करोड़ों और लोगों को गंभीर रूप से भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। इस संकट से आम आदमी की थाली पर सीधा असर पड़ने वाला है और रोजमर्रा की चीजें बहुत महंगी हो सकती हैं।

समुद्री रास्तों पर संकट और WFP की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस समय दुनिया भर में लगभग 300 million people गंभीर रूप से भुखमरी से जूझ रहे हैं, जो कि आज से छह साल पहले के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। 10 सितंबर 2026 तक की स्थिति को देखते हुए WFP का अनुमान है कि अगर यह सैन्य संघर्ष ऐसे ही चलता रहा और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, तो करीब 45 million और लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने कहा है कि दुनिया का भोजन अब इन आपसी लड़ाइयों में केवल एक हथियार या मोहरा बनकर रह गया है और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। WFP के कार्यकारी निदेशक Carl Skau ने भी चिंता जताई है कि फंड की कमी के कारण राहत एजेंसियों के पास मदद के लिए कुछ नहीं बचेगा।

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तीन मुख्य समुद्री रास्तों पर रुकावट

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अधिकारी Damien Chevalier के अनुसार, समुद्री इलाकों में जिस तरह के खतरे पैदा हुए हैं, वे पहले कभी नहीं देखे गए। दुनिया के तीन सबसे जरूरी समुद्री मार्ग—Strait of Hormuz, Red Sea, और Black Sea—पूरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे संघर्ष की वजह से लगभग 2,000 vessels और 20,000 seafarers बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वहीं काले सागर यानी ब्लैक सी में तेल के टैंकरों और अनाज ले जाने वाले जहाजों पर लगातार ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे यूक्रेन के बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही रोजाना केवल एक या दो जहाज ही रह गई है, जबकि फसल कटाई के मौसम में यहां रोजाना 20 से 30 जहाज आया करते थे। इसके अलावा लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कमर्शियल जहाजों का रास्ता भी लगातार बदल रहा है और माल ढुलाई रुक रही है।

महंगाई की मार और आम जनता पर असर

इन सभी रुकावटों का असर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। हॉर्मुज का रास्ता तेल और खाद के व्यापार के लिए बेहद जरूरी है, जबकि ब्लैक सी के रास्ते रूस और यूक्रेन से गेहूं का ट्रांसपोर्ट होता है जो दुनिया के कुल गेहूं व्यापार का एक तिहाई हिस्सा है। जहाजों के रास्ते बंद होने और ईंधन के दाम बढ़ने से WFP के अपने कामकाज पर भी भारी असर पड़ा है। संस्था के शिपिंग खर्च में 20 percent और हवाई जहाज के ईंधन में 35 percent तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके कारण कमजोर और गरीब इलाकों में खाने-पीने की चीजें बहुत महंगी हो गई हैं। उदाहरण के लिए, इस साल फरवरी के बाद से सूडान में खाने-पीने की बुनियादी चीजों के दाम करीब 40 percent तक बढ़ चुके हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले और दुनिया के अन्य हिस्सों से ताल्लुक रखने वाले आम लोगों के लिए भी आने वाले दिनों में खाने-पीने का सामान खरीदना और ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

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