यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच खूनी संघर्ष, हालिया झड़पों में 81 लोगों की मौत.

Sushma Kumari4 September 20263 min read30 viewsYemen
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच खूनी संघर्ष, हालिया झड़पों में 81 लोगों की मौत.

यमन में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है और वहां हूती विद्रोहियों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना के बीच भीषण जंग छिड़ गई है। इस ताज़ा खूनी संघर्ष में 3 सितंबर 2026 को गुरुवार से लेकर अब तक कम से कम 81 लोगों की मौत हो चुकी है। यह लड़ाई मुख्य रूप से लाल सागर के तटीय इलाकों और ताइज़ प्रांत के आसपास केंद्रित है, जिससे साल 2022 में हुए संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम के बाद से चल रहे तनाव में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। आम लोगों और स्थानीय निवासियों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि हिंसा का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

अलग-अलग इलाकों में हुआ भारी जानमाल का नुकसान

तथ्यों के मुताबिक इस लड़ाई में सरकारी पक्ष और विद्रोही गुट दोनों को ही भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कैजुअल्टी रिपोर्ट्स के अनुसार लाल सागर के तटीय हिस्से में सरकार के 24 सैनिक मारे गए हैं, जबकि अंतर्देशीय ताइज़ क्षेत्र में 15 जवानों की जान चली गई है। इसके अलावा कम से कम 42 हूती लड़ाके भी इन झड़पों में मारे गए हैं। दूसरी तरफ यमन की सेना ने अलग से जानकारी दी है कि उन्होंने पश्चिमी ताइज़ मोर्चों पर कार्रवाई करते हुए करीब 50 हूती लड़ाकों को ढेर कर दिया है और कुछ अन्य को जिंदा भी पकड़ा है। हिंसा की यह आग लगातार फैलती जा रही है जिससे इलाके के हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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रणनीतिक इलाकों पर कब्जा करने की कोशिश

हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी तट की तरफ से एक बड़ा हमला बोला था जिसका मकसद रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य की तरफ बढ़ना था। उनका मुख्य उद्देश्य मोखा बंदरगाह शहर को ताइज़ से जोड़ने वाले रास्ते को काटकर उसे अलग-थलग करना था। गुरुवार के दिन हूती बलों ने ताइज़ और होदेइदाह प्रांतों में कुल 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन हमले किए, जिसमें अल-वाज़ियाह ब्रिज पर हुआ मिसाइल हमला भी शामिल है। इसके जवाब में सरकारी बलों ने मोखा बंदरगाह को निशाना बनाने आ रही दो बम से भरी नावों को समंदर में ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा ताइज़ एक्सिस और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस ने मिलकर मकबानह और अल-काधह मोर्चों पर जवाबी हमले शुरू किए और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से कई दुश्मन ड्रोनों को हवा में ही नाकाम कर दिया।

अधिकारियों की चेतावनी और आम जनता की मुश्किलें

यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशद मोहम्मद अल-अलीमी ने 3 सितंबर को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों की इस जिद का करारा जवाब दिया जाएगा और इससे सैन्य संतुलन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वहीं यमन के सूचना मंत्री मोअम्मर एर्यानी ने हूती खतरे को अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। इसके साथ ही राजनीतिक कार्यकर्ता रियाद अल्दुबाई ने इस आक्रमण को यमन के आर्थिक संस्थानों और बुनियादी ढांचे पर सीधा हमला करार दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के मुताबिक इस भीषण लड़ाई की वजह से लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया है और अगस्त के आखिरी हफ्ते में अकेले ताइज़ प्रांत के भीतर 1,600 से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो चुके हैं।

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