Yemen Crisis: यमन में फिर भड़की हिंसा, सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच झड़प में 60 से ज्यादा लोगों की मौत.

यमन में हालात एक बार फिर से बेहद खराब हो चुके हैं जहाँ सरकारी फौजों और हूती विद्रोहियों के बीच हुई भीषण झड़पों में 60 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। यह हिंसा मुख्य रूप से Taiz और Hodeidah प्रांतों में देखने को मिल रही है जहाँ पिछले कुछ दिनों से लगातार हमले जारी हैं। साल 2022 में हुए संघर्ष विराम के जुलाई में टूटने के बाद से यह यमन के अंदर अब तक की सबसे भयानक लड़ाइयों में से एक मानी जा रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
ताइज़ और हुदैदाह में हिंसक झड़पें और नुकसान
बीते शनिवार को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अकेले एक दिन की लड़ाई में 26 सरकारी सैनिकों और 31 हूती लड़ाकों की मौत हो गई। इसके अलावा आम नागरिकों को भी इस खूनी संघर्ष की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। ताइज़ में एक बस पर हुए मिसाइल हमले में 6 लोगों की मौत हो गई और 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर, हाइजात अल-अब्द सड़क पर हूती बलों द्वारा दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल की चपेट में आने से 4 लोगों की जान चली गई और 9 अन्य जख्मी हो गए। गत 3 सितंबर से शुरू हुई इस ताजा हिंसा में अब तक मरने वालों का कुल आंकड़ा कम से कम 90 तक पहुंच चुका है, जिसमें 40 सैनिक और 50 विद्रोही शामिल हैं। इससे पहले शुक्रवार को कुल मौतों का अनुमान 120 से ज्यादा लगाया गया था।
रणनीतिक इलाकों पर कब्जे की जंग
हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Bab al-Mandab Strait तक पहुंचने और मोखा बंदरगाह के रास्ते को पूरी तरह से काटने के लिए हुदैदाह और ताइज़ में एक साथ जमीनी हमले शुरू कर दिए थे। इन हमलों का जवाब देने के लिए सरकारी बलों को सऊदी अरब का पूरा समर्थन मिल रहा है, जिसकी मदद से सेना ने कई अहम ठिकानों को वापस अपने कब्जे में ले लिया है। यमन की सेना ने जानकारी दी है कि उन्होंने हुदैदाह के Hays district पर पूरी तरह से दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया है। सरकारी वायु सेना ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए शुक्रवार को करीब 15 एयरस्ट्राइक किए, अदन से अतिरिक्त सैन्य बल भेजे गए और हूती सेना के 3 ड्रोन भी हवा में मार गिराए गए।
मानवीय संकट और अपील
प्रेसीडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन Rashad al-Alimi ने हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते कदमों को रोकने का कड़ा संकल्प लिया है। इस बीच, यमन के श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने देश में गंभीर मानवीय संकट की चेतावनी देते हुए तुरंत सहायता की गुहार लगाई है। लगातार हो रही भारी गोलीबारी के कारण हजारों आम नागरिकों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है और कई शरणार्थी शिविरों को खाली कराना पड़ा है। स्थानीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय संघर्ष के लिहाज से बहुत संवेदनशील है क्योंकि कई परिवार अभी भी सक्रिय युद्ध क्षेत्रों के पास फंसे हुए हैं और मदद का इंतजार कर रहे हैं।