यमन में बड़ा संघर्ष, अल-कदाहा में सप्लाई रूट बंद होने से हजारों लोग बेघर.

यमन के ताएज शहर के पास अल-कदाहा इलाके में अचानक सैन्य तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसकी वजह से जरूरी रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए हैं। इस खूनी संघर्ष और हिंसा की वजह से आम लोगों की जिंदगी नर्क बन गई है और हजारों परिवार अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। खाने-पीने का सामान और दवाइयां लाने ले जाने वाले मुख्य रास्ते बंद होने से हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं और आम जनता दाने-दाने को मोहताज हो रही है।
मोचा शहर पर कब्जा और रास्तों की जब्ती
हूती बलों ने 10 सितंबर को मोचा बंदरगाह वाले शहर पर अपना कब्जा जमा लिया था। इसके बाद इन लड़ाकों ने मकबनाह, अल-कदाहा, जबल हबाशी और मावजा जैसे इलाकों में तेजी से आगे बढ़ना शुरू कर दिया। इन इलाकों पर कब्जा करके उन्होंने ताएज शहर और समुद्र तट को जोड़ने वाले सबसे मुख्य रास्ते को पूरी तरह से काट दिया है। हालात तब और ज्यादा खतरनाक हो गए जब 11 सितंबर तक ये ताकतवर लड़ाके बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में स्थित पेरिम द्वीप तक जा पहुंचे, जिससे समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
सेना का एक्शन और हवाई हमले
इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए यमन की सेना ने 11 सितंबर को ताएज-मोचा और मोचा-धुबाब सड़कों को एक्टिव मिलिट्री जोन यानी सक्रिय सैन्य क्षेत्र घोषित कर दिया। इसके बाद सेना ने पश्चिमी तट के आसपास जोरदार हवाई हमले शुरू कर दिए। सेना के प्रवक्ता माजिद अल-नुजैली ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी जान बचाने के लिए इन रास्तों पर बिल्कुल न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
गहराता मानवीय संकट और स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
इस लड़ाई की वजह से देश में भयंकर मानवीय संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र यानी UN की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 सितंबर तक कम से कम 46,000 लोग बेघर हो चुके हैं। इससे पहले 3 सितंबर तक ताएज और अल-होदेइदाह में 18,500 लोगों के विस्थापित होने की खबर आई थी। लड़ाई की चपेट में आने से आम लोगों की जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह ठप हो गई हैं। अल-कदाहा हेल्थ यूनिट को बंद करना पड़ा है और अल-बरह इमरजेंसी सेंटर को भी इस जंग में भारी नुकसान पहुंचा है।
सरकारी कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय चिंता
सरकारी फौजों और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस ने जानकारी दी है कि अल-कदाहा में लगातार आमने-सामने की झड़पें जारी हैं। इन फौजों ने 8 सितंबर को अल-मुकाजामा और अल-मिहाल इलाकों पर दोबारा अपना नियंत्रण हासिल करने का दावा किया था। इस बढ़ते खूनी संघर्ष को देखकर दुनिया भर के देशों ने गहरी चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 12 सितंबर को चेतावनी दी थी कि यह युद्ध अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री राजकुमार फैसल बिन फरहान ने हूती विद्रोहियों की इन हरकतों को बेहद खतरनाक escalation यानी तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है। वहीं, अमेरिका के दूतावास ने 8 सितंबर को साफ कहा था कि हूती लड़ाकों को अपनी इस आक्रामकता का परिणाम भुगतना ही होगा। यमन के श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश भर में 22 मिलियन से ज्यादा लोगों को तुरंत मानवीय सहायता की सख्त जरूरत है। इस संकट के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए आप ReliefWeb Report पर पूरी जानकारी देख सकते हैं।