यमन में फिर भड़की हिंसा, अल-लाबनात कैंप पर जबरदस्त हमला और संघर्ष में 60 लोगों की हुई मौत.

यमन देश में हालात एक बार फिर से बहुत ज्यादा खराब हो गए हैं और सरकार तथा हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई बहुत तेज हो गई है। रविवार, 6 सितंबर 2026 को यमन की सरकारी सेना ने उत्तरी अल-जॉफ़ गवर्नरट में बने अल-लाबनात कैंप पर बड़ा जवाबी हमला बोल दिया है। इस भयानक संघर्ष की शुरुआत सप्ताहांत यानी 5-6 सितंबर के दौरान हुई, जिसमें दोनों तरफ से हुई भारी गोलीबारी और झड़पों में कुल 60 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में 26 सरकारी सैनिक और 31 हूती लड़ाके शामिल हैं। इसके अलावा ताइज़ शहर में एक बस पर हुए मिसाइल हमले में 6 आम नागरिकों की मौत हो गई और 7 लोग बुरी तरह से घायल हो गए हैं।
ताइज़ और होदेइदाह में बढ़ा तनाव
यमन के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में हिंसा बहुत बढ़ गई है, खास तौर पर ताइज़ और दक्षिणी होदेइदाह इलाकों में, जहां दोनों पक्ष लाल सागर के रास्ते और बाब अल-मندگان जलडमरूमध्य के पास अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यमन की सेना की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ताइज़ और अल-हुदयदाह के हैफान मोर्चे पर अपनी पुरानी रणनीतिक जगहों को फिर से अपने कब्जे में ले लिया है। सेना ने यह कार्रवाई हूती विद्रोहियों के उस हमले को रोकने के लिए की, जिसके जरिए वे सरकार के कब्जे वाले बंदरगाह मोखा को बाकी हिस्सों से अलग करना चाहते थे। इससे पहले शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को यमन की सैन्य वायु सेना ने हूती ठिकानों पर कुल 15 हवाई حملے किए, जबकि दूसरी तरफ विद्रोहियों ने भी अपनी तरफ से मिसाइल और ड्रोन से हमले जारी रखे।
लाखों लोगों को भुगतना पड़ रहा है भारी असर
इस खूनी संघर्ष का आम जनता और परिवारों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। 3 से 4 सितंबर के बीच मक्बानह और जबाल हबाशी जिलों में भारी झड़पों के कारण 900 से ज्यादा परिवारों, जिनकी कुल संख्या करीब 1,790 घर बनती है, को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित जगहों पर भागना पड़ा है। यमन के श्रम और सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने इस मामले में तुरंत मदद की अपील की है। मंत्रालय के अनुसार, देश के कुल 22 मिलियन यानी दो करोड़ बीस लाख लोगों को मानवीय सहायता की सख्त जरूरत है और इनमें से 18.3 मिलियन लोग गंभीर रूप से भूखमरी यानी अकाल जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस पूरी तबाही और विस्थापन की विस्तृत जानकारी ReliefWeb Report में दी गई है।
शांति समझौता टूटने के बाद बिगड़े हालात
जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र यानी UN की मदद से चल रहा संघर्षविराम समझौता पूरी तरह से टूट गया था, जिसके बाद से देश में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अंसारुल्लाह राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हिज़ाम अल-असद ने 5 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि हूती सेना सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की हरकतों का जवाब देने के लिए अपनी नई सैन्य रणनीतियों को जमीन पर उतार रही है। वहीं दूसरी तरफ, यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलिमी ने साफ कर दिया है कि सरकार अब पिछले समय की तरह चुपचाप हमले सहने वाली नहीं है और हूती हमलों का कड़ा सैन्य जवाब दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने अगस्त 2026 में ही यह चेतावनी दे दी थी कि देश एक बार फिर से बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की तरफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है।