Yemen Crisis: यमन में हौथी विद्रोहियों के बड़े हमले से मचा हड़कंप, क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया गंभीर खतरा.

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने एक औपचारिक चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि लगातार हो रहे हौथी सैन्य हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री Dr. Shai'a Mohsen Al-Zandani के नेतृत्व वाली यमन सरकार ने दुनिया भर के देशों से इस स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है। 12 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक आपातकालीन सत्र के दौरान, यमन के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत Abdullah al-Saadi ने लाल सागर में नई स्थिति पैदा करने की कोशिशों के लिए हौथी मिलिशिया की कड़ी निंदा की और परिषद से समूह के खिलाफ सख्त हथियार प्रतिबंध लागू करने का आग्रह किया।
लाल सागर के अहम इलाकों पर हौथी विद्रोहियों का कब्जा
यह वर्तमान संकट हौथी सेना के एक बड़े सैन्य अभियान के बाद शुरू हुआ है, जिसे 3 सितंबर को शुरू किया गया था। इस आक्रामक अभियान के शुरू होने के बाद से, हौथी बलों ने पश्चिमी यमन में लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना कब्जा जमा लिया है। इन कब्जों में रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह शहर मोखा, मायुन द्वीप यानी पेरिम, और ग्रेटर तथा लेसर हनीश द्वीप भी शामिल हैं। इन इलाकों पर नियंत्रण मिलने के बाद इस समूह का अब यमन के पूरे लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा हो गया है, जो वैश्विक शिपिंग और सऊदी तेल निर्यात के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है।
समुद्र में नाविकों के लिए चेतावनी और सऊदी अरब पर असर
हौथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Yahya Saree ने कहा कि सऊदी जहाजों को छोड़कर सभी संस्थाओं के लिए समुद्री आवाजाही सुरक्षित है, क्योंकि सऊदी जहाजों पर एक घोषित नाकाबंदी लागू की गई है। इस अशांति के जवाब में, सऊदी अरब ने इराक से छोड़े गए ड्रोन हमलों के बाद अपनी एक प्रमुख ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को बंद करने की सूचना दी है। अमेरिका ने इस बढ़ती हिंसा की कड़ी निंदा की है और विशेष रूप से सऊदी अरब और यमन के शहरों पर हौथी मिसाइल और ड्रोन हमलों को निशाना बनाया है, साथ ही ईरान पर इस मिलिशिया के कामों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। जापान के प्रेस सचिव KITAMURA Toshihiro ने भी इस निंदा में अपनी आवाज जोड़ी और तुरंत तनाव कम करने की मांग की।
हजारों लोग हुए बेघर और गहराया मानवीय संकट
इस सैन्य अभियान की वजह से आम लोगों को बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर प्रवासन की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुई लड़ाई की वजह से पश्चिमी यमन में लगभग 50,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस संख्या के जुड़ने के बाद जुलाई से अब तक अपने घरों को छोड़कर जाने वाले कुल लोगों की संख्या कम से कम 76,000 तक पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत Hans Grundberg ने सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी है कि यह संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि Asim Iftikhar Ahmad ने भी क्षेत्र में बिगड़ती स्थिरता को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।