Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों ने अल-माखा शहर पर किया कब्जा, संघर्ष में भारी तनाव और हिंसा बढ़ी.

यमन में चल रहे गृहयुद्ध के बीच हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। यमन के पश्चिमी तट पर स्थित एक बेहद अहम बंदरगाह शहर अल-माखा पर हूती विद्रोहियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। इस बड़ी घटना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी भीषण लड़ाई के बाद सरकारी बलों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है।
युद्ध की स्थिति और सरकारी बलों का पीछे हटना
প্রেসিডেনশিয়াল লিডারশিপ কাউন্সিল यानी PLC के तहत काम करने वाले सरकारी बलों को होदेइदाह प्रांत के हेयस और अल-खव्वाह जिलों के साथ-साथ तियाज प्रांत के अल-माखा से भी पीछे हटना पड़ा है। अब ये सभी सैनिक बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य के पास स्थित धुबाब की तरफ जा रहे हैं। हालात को काबू में करने के लिए 10 सितंबर 2026 तक सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन सेना के विमान अल-नार पहाड़ियों के पास लगातार हवाई हमले कर रहे हैं ताकि हूती विद्रोहियों के आगे बढ़ने के रास्ते को रोका जा सके। इस बारे में अधिक जानकारी आप ReliefWeb की इस रिपोर्ट में देख सकते हैं।
पीएलसी के उपाध्यक्ष तारेक सालेह ने इस बात की पुष्टि की है कि इस संघर्ष के दौरान नेशनल रेजिस्टेंस और जाइंट्स ब्रिगेड समेत कई सरकारी सैन्य इकाइयों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और कई सैनिक हताहत हुए हैं। सेना को फिर से मजबूत करने के लिए एक नए कमांड सेंटर का गठन किया जा रहा है। 3 सितंबर 2026 के बाद से यमन में हिंसा में अचानक बहुत तेजी आ गई है। साल 2022 में हुए संघर्षविराम के टूटने के बाद से यह दौर अब तक का सबसे खतरनाक और सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है।
सऊदी अरब तक पहुंची हिंसा की आंच
यमन की यह हिंसा अब देश की सीमाओं को पार करके पड़ोसी देशों तक भी पहुंच चुकी है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब में तेल से जुड़ी कई जगहों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए हैं। इन हमलों की वजह से सऊदी अरब में 73 लोग घायल हो गए हैं और खामिस मुशायत इलाके में कुछ समय के लिए आपातकालीन अलर्ट जारी करना पड़ा था। इस स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। आप इस बारे में विस्तार से संयुक्त राष्ट्र की इस आधिकारिक विज्ञप्ति में पढ़ सकते हैं।
यमन में वैधता का समर्थन करने वाले गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने हूती विद्रोहियों के इन हमलों की कड़ी निंदा की है। वहीं दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत ने 7 सितंबर 2026 को सभी पक्षों से अपील की है कि वे संयम से काम लें और शांति बनाए रखें। दूसरी ओर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 10 सितंबर को एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध सऊदी अरब की सीमा के अंदर फैलता है तो मक्का रक्षा गठबंधन को सक्रिय किया जा सकता है। आपको बता दें कि यह रक्षा समझौता पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच 7 अगस्त को साइन हुआ था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सऊदी अरब की सुरक्षा और उसके आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हुए अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है।