Yemen में बड़ा संघर्ष, हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, मची अफरातफरी।

यमन का ऐतिहासिक और सामरिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह मोखा अब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में आ गया है। वैश्विक कॉफी व्यापार के लिए एक समय में महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस तटीय शहर के गिरने से पूरे इलाके में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। यह घटना बीते 10 सितंबर 2026 को हुई, जिसे साल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद से इस विद्रोही गुट की सबसे बड़ी और खतरनाक क्षेत्रीय बढ़त माना जा रहा है। इस कब्जे के बाद हूती विद्रोहियों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्तों पर सीधे तौर पर पैर पसारने का बड़ा मौका मिल गया है।
यमन सरकार और अरब गठबंधन की प्रतिक्रिया
इस बड़े झटके के बाद सरकारी बलों को मजबूरी में शहर के दक्षिण की तरफ पीछे हटना पड़ा। यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के उपाध्यक्ष तारेक सालेह ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की कि सरकारी सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि सेना को फिर से संगठित करने के लिए अरब गठबंधन के साथ मिलकर एक वैकल्पिक कमान सेंटर बनाया गया है। रॉयटर्स को यमन सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की थी कि मोखा बंदरगाह अब उनके हाथ से निकल चुका है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सऊदी के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने 11 सितंबर से 12 सितंबर 2026 के बीच कड़े जवाबी हमले किए। यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता मजेद अब्दुल्ला अल-नाजिली ने मीडिया को बताया कि मोखा-धुबाब सड़क मार्ग और बंदरगाह के पास किए गए हवाई हमलों में हूती विद्रोहियों के कई वाहन और हथियार पूरी तरह तबाह कर दिए गए। वहीं दूसरी ओर, हूती मीडिया ने भी इस बात को स्वीकार किया कि सऊदी के विमानों ने 11 सितंबर को मोखा के एयरपोर्ट और सीपोर्ट को निशाना बनाया था। हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुसलाम ने दावा किया कि उनके लड़ाकों की ओर से की जा रही सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से रक्षात्मक थी और वे तभी हमले रोकेंगे जब यमन पर बाहर से होने वाले हमले पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और गहराता मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 10 सितंबर 2026 को ही इस बात की कड़ी चेतावनी दी थी कि मोखा पर कब्जा होने से साल 2022 से चल रही相对 शांति का दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे संघर्ष का एक बहुत ही खतरनाक चरण शुरू हो चुका है। इस अचानक आई तेजी से यमन में एक बार फिर से बेहद गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 के बाद से पूरे यमन में 76,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। हालात इतने खराब हैं कि विस्थापित लोगों की यह संख्या 12 सितंबर 2026 से ठीक एक हफ्ता पहले के मुकाबले चौगुनी हो गई है, जिससे आम जनता की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।