Yemen Crisis: यमन नेशनल डिफेंस काउंसिल का कड़ा ऐलान, हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सेना बढ़ाएगी ताकत

यमन में चल रहे सैन्य संकट के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां देश की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने हौथी विद्रोहियों की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने का पूरा मन बना लिया है। 10 सितंबर 2026 को यमन के राष्ट्रपति डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलिमी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक हुई, जिसमें देश के मौजूदा हालात पर गंभीर चर्चा की गई। इस बैठक में सरकार ने साफ कर दिया कि विद्रोही गुटों द्वारा अस्थायी रूप से कब्जा करने की कोशिशों को किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा और यमन की सेना उन्हें करारा जवाब देगी।
सैन्य रणनीति और रणनीतिक ठिकाने
अल-मोखा, हेस और अल-खोखाह जैसे इलाकों में हाल ही में हौथी मिलिशिया की तरफ से बढ़ाई गई गतिविधियों के बाद सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। काउंसिल ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई देश की संप्रभुता और सरकारी संस्थाओं को बचाने की एक बहुत बड़ी जंग है। सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि यमन के समुद्री तटों, द्वीपों या जलक्षेत्र का इस्तेमाल देश या उसके पड़ोसी मुल्कों के खिलाफ खतरे के रूप में बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा। इन सभी खतरों से निपटने के लिए यमन की सेना ने अपने रक्षा अभियानों को और अधिक व्यापक बनाने का फैसला किया है। हालात को देखते हुए सरकारी बलों ने अल-मोखा के दक्षिण में अपनी तैनाती बढ़ा दी है और रणनीतिक बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास धुबाब में एक नया कमांड सेंटर भी बना लिया है।
कूटनीतिक हलचल और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यमन ने अपने पड़ोसी देश सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता दिखाई है और सऊदी पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास बहुत तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने हौथी गतिविधियों को लेकर ईरान को एक औपचारिक चेतावनी दी है। इसके अलावा यमन की विदेश मंत्री अफराह अल-जुबा ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से बातचीत करके बढ़ते समुद्री जोखिमों पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन और यूनाइटेड किंगडम के अनुरोध पर आज संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग एक इमरजेंसी ब्रीफिंग भी करने वाले हैं। यमन की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने इन लगातार बदलते हालातों पर नजर रखने और जरूरी कदम उठाने के लिए खुद को स्थायी सत्र में रखने का फैसला किया है ताकि देश की सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।