यमन ने ईरान की सुलह पेशकश ठुकराई, सऊदी से युद्धविराम पर भी दो टूक इनकार. बोला हम सब जानते हैं.
अंसारुल्लाह का दावा है कि ईरान ने दो बार सऊदी अरब से युद्धविराम के लिए दबाव डाला, लेकिन यमन ने हर प्रस्ताव ठुकरा दिया। पढ़ें पूरी खबर।

यमन: यमन के विद्रोही संगठन अंसारुल्लाह ने खुलासा किया है कि ईरान ने दो अलग-अलग मौकों पर उस पर सऊदी अरब के साथ युद्धविराम मानने का दबाव बनाया। संगठन के अधिकारियों के मुताबिक़ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की हालिया मध्यस्थता की पेशकश भी इसमें शामिल थी, जिसे यमन ने सिरे से खारिज कर दिया।
अंसारुल्लाह के अधिकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष तेहरान की क्षेत्रीय कूटनीति का मोहरा नहीं है। इसी वजह से उन्होंने हर कोशिश को ठुकराया। खबर के मुताबिक़ इस रुख़ से "प्रतिरोध की धुरी" के भीतर खिंचाव की बात भी सामने आ रही है। संगठन के कुछ नेताओं को चिंता है कि ईरान का सुधारवादी खेमा यमन की स्थिति का इस्तेमाल व्यापक क्षेत्रीय समझौतों के लिए कर सकता है।
यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले अंसारुल्लाह के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल-सलाम ने मार्च 2026 की सऊदी शांति पहल को अपर्याप्त बताकर खारिज कर दिया था। उनका तर्क था कि सना अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और हुदैदा बंदरगाह पर लगी पाबंदियां पूरी तरह नहीं हटाई गईं।
दूसरी तरफ़ अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की विदेश मंत्री अफ़राह अल-ज़ूबा ने भी साफ़ किया है कि यमन को "ईरानी सौदेबाज़ी का मोहरा" नहीं बनने दिया जाएगा। दोनों पक्षों के रुख़ से साफ़ है कि यमन के भीतर भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं है।
हवाई हमले और बाब अल-मंदब में जंग
हालात पहले से ही बेहद तनावपूर्ण हैं। 10 अक्टूबर 2026 को अंसारुल्लाह ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे और कुछ अन्य ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में 12 से 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास भी लड़ाई और सैन्य गतिविधियां जारी हैं।
इन सबके बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई राजनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं। लेकिन यमन के विभिन्न गुट मध्यस्थता की हर कोशिश को नकार रहे हैं, जिससे शांति की राह अभी भी धुंधली दिखती है।