यमन में बड़ा संकट, हूती नियंत्रित इलाकों के सर्टिफिकेट्स के प्रमाणीकरण पर लगी रोक, छात्रों का भविष्य अधर में।

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती-नियंत्रित क्षेत्रों से जारी होने वाले शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण को निलंबित कर दिया है। एडन स्थित शिक्षा मंत्रालय द्वारा जुलाई 2026 के अंत में एक सर्कुलर जारी किया गया था और अगस्त 2026 की शुरुआत में इसे स्पष्ट किया गया, जिसके बाद हजारों छात्र अपनी योग्यताओं को सत्यापित करने में असमर्थ हो गए हैं। इस प्रशासनिक फैसले के कारण इन क्षेत्रों के छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अपने सपनों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं और वे अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अधिकारियों का पक्ष और प्रशासनिक मजबूरियां
शिक्षा मंत्री Adel al-Abadi ने स्पष्ट किया कि यह निलंबन सभी शैक्षणिक वर्षों पर लागू नहीं होता है क्योंकि कुछ अवधि के रिकॉर्ड अभी भी आसानी से उपलब्ध और सुलभ हैं। एडन स्थित शिक्षा मंत्रालय के सलाहकार Aref Naji Ali ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय ने किसी भी छात्र के सर्टिफिकेट को रद्द नहीं किया है। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों की प्रामाणिकता और छात्र की पहचान को सत्यापित करने के लिए आवश्यक डेटा तक कोई पहुंच नहीं बची है, जिसके कारण प्रमाणीकरण को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। उनका यह भी मानना है कि शिक्षा को कभी भी राजनीतिक विभाजन का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।
दो विरोधी शिक्षा प्रणालियों के बीच फंसा भविष्य
यह प्रशासनिक गतिरोध देश की दो प्रतिद्वंद्वी शिक्षा प्रणालियों के बीच पिछले एक दशक से चले आ रहे आपसी विवाद के कारण पैदा हुआ है। ताइज विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र शोधकर्ता Mohammed Abdu ने इस पूरी स्थिति को दोनों प्रतिस्पर्धी अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय की पूरी तरह से कमी का परिणाम बताया है। एडन स्थित विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुसार जो छात्र पढ़ाई के सिलसिले में विदेश जाना चाहते हैं, उनके लिए अपने शैक्षणिक दस्तावेजों का प्रमाणीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है।
छात्रों और शिक्षकों की चिंताएं
इस नई नीति के लागू होने के बाद से छात्रों और शिक्षकों के बीच भारी निराशा और मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है। सना के एक शिक्षक Ammar Amri ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से छात्रों के शैक्षणिक अवसर हमेशा के लिए समाप्त हो सकते हैं। वहीं रायमह प्रांत के रहने वाले 18 वर्षीय छात्र Ayman Ahmed ने माता-पिता और छात्रों में फैली लाचारी की भावना का जिक्र करते हुए सना और एडन के शिक्षा अधिकारियों से तुरंत आपसी बातचीत और समन्वय करने की अपील की है। सना में रहने वाले 19 वर्षीय हाई स्कूल ग्रेजुएट Bashar Mohammed को सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि एडन की सरकार उनके दस्तावेजों और डिग्रियों को कभी मान्यता नहीं देगी। संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है कि संघर्ष के कारण पैदा हुए इस शैक्षिक संकट ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है और बड़ी संख्या में बच्चों को स्कूल व्यवस्था से बाहर कर दिया है।