यमन में फिर भड़का संघर्ष, सऊदी अरब के समर्थन से टिके हैं सरकारी संस्थान, संयुक्त राष्ट्र ने दी बड़ी चेतावनी।

यमन के हालात इन दिनों बहुत ज्यादा खराब चल रहे हैं और वहां पर फिर से बड़े पैमाने पर जंग छिड़ने का खतरा मंडराने लगा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यमन के स्थायी प्रतिनिधि Abdullah Al-Saadi ने 13 अगस्त 2026 को यह साफ कहा कि देश की सरकारी संस्थाओं को बचाने में सऊदी अरब का आर्थिक, राजनीतिक और मानवीय सहयोग बहुत बड़ा सहारा बना हुआ है। उन्होंने हूती विद्रोहियों पर जमकर निशाना साधा और कहा कि वे देश में शांति लाने के बजाय सिर्फ अराजकता फैलाना चाहते हैं और ईरान के इशारों पर काम कर रहे हैं। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए आप ReliefWeb की रिपोर्ट देख सकते हैं।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ते हमले
यमन के हालात को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने भी चेतावनी दी है कि साल 2022 में हुए समझौते के बाद से यह पहला मौका है जब देश में सबसे बड़े स्तर पर युद्ध लौटने का खतरा पैदा हो गया है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर मंडराते खतरों ने सभी की चिंता बढ़ा दी है। जैसे-जैसे महीना आगे बढ़ा, 27 अगस्त 2026 तक आते-आते यमन में हिंसा बहुत ज्यादा तेज हो गई। देश की विदेश मंत्री Afrah al-Zouba ने बहरीन की राजधानी मनामा से अपनी खाड़ी देशों की यात्रा शुरू कर दी है ताकि सरकार के कामकाज को फिर से पटरी पर लाने के लिए पड़ोसी देशों से समर्थन जुटाया जा सके।
हूती विद्रोहियों की हरकतें और सऊदी कार्रवाई
दूसरी तरफ, सरकारी समर्थक बलों का कहना है कि हूती लड़ाकों ने होदेइदाह प्रांत के अल-खवखाह के उत्तर में स्थित एक गांव पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला कर दिया है। यह संघर्ष अब और भी बड़े इलाके में फैल चुका है क्योंकि हूतियों ने सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और लाल सागर को सऊदी जहाजों के आने-जाने के लिए बंद कर दिया है। इन हालातों से निपटने के लिए एक सऊदी के नेतृत्व वाली नौसैनिक गठबंधन सेना तैयार की गई है। हाल ही में Yanbu ऑयल फैसिलिटी के ऊपर ग्रीस देश द्वारा संचालित एयर डिफेंस सिस्टम ने ड्रोन के झुंड को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया है।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता
यमन के अंदर आम लोगों की स्थिति पहले से ही बहुत दयनीय बनी हुई है और करीब 22.3 मिलियन लोग ऐसे हैं जिन्हें जिंदा रहने के लिए मदद की सख्त जरूरत है। इस मानवीय संकट को और ज्यादा गंभीर तब बना दिया गया जब हूती बलों ने संयुक्त राष्ट्र और कई एनजीओ के कर्मचारियों को बिना किसी वजह के हिरासत में ले लिया और दूसरी तरफ सऊदी गठबंधन के हवाई हमले भी लगातार जारी हैं। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर यह आरोप लगाया है कि ईरान ही हूती अभियानों को चुपचाप समर्थन दे रहा है, जिसकी वजह से पूरे इलाके की शांति खतरे में पड़ गई है और लाल सागर तथा अदन की खाड़ी में होने वाला वैश्विक व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।