यमन में बड़ा मुकाबला, अल-जौफ में सेना ने गिराए हूती गुट के 5 सुसाइड ड्रोन

Sushma Kumari11 September 20262 min read24 viewsYemen
यमन में बड़ा मुकाबला, अल-जौफ में सेना ने गिराए हूती गुट के 5 सुसाइड ड्रोन

यमन की सेना ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हूती मिलिशिया के 5 सुसाइड ड्रोन हवा में ही मार गिराए हैं। यह सैन्य मुकाबला अल-जौफ गवर्नरेट की राजधानी अल-हजम के पूर्वी हिस्से में हुआ, जहां सरकारी सेना ने अपनी ताकत दिखाते हुए इन खतरनाक ड्रोनों को समय रहते नष्ट कर दिया। इस घटना से पहले बुधवार, 9 सितंबर 2026 को भी सरकारी बलों ने इसी इलाके में एक बड़े मानवरहित विमान को तबाह किया था, जिसके बारे में शक था कि उसमें विस्फोटक भरे हुए थे। लगातार हो रही इन हवाई गतिविधियों से यमन के अंदरूनी हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।

क्षेत्र में बढ़ रहा है तनाव और सऊदी अरब पर हमले

यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पूरे इलाके में क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है। इससे पहले 8 सितंबर को हूती समूह ने दक्षिण सऊदी अरब के कई सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे। इन हमलों की चपेट में अभा, खमीस मुशायत और जिज़ान जैसे प्रमुख शहर आए थे, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कुल 73 लोग घायल हुए थे और कई जगहों पर आग लग गई थी। इस खतरनाक हमले के बाद गठबंधन सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने सख्त कदम उठाने और जरूरी जवाबी कार्रवाई करने की बात कही थी। इसके जवाब में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने यमन के अलग-अलग प्रांतों में हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं।

मोखा बंदरगाह पर कब्जा और अंतरराष्ट्रीय चिंता

इस बीच स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ते हुए ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर मोखा पर 10 सितंबर 2026 को कब्जा कर लिया है। इस कब्जे के बाद लाल सागर यानी Red Sea के समुद्री जहाजों के रास्तों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। इन तमाम बिगड़ते हालातों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र यानी UN के यमन मामलों के विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने सभी पक्षों से संयम बरतने की जोरदार अपील की है। हालात की गंभीरता को भांपते हुए 10 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बिगड़ती स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक भी बुलाई थी, ताकि इस बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस रास्ता निकाला जा सके।

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