यमन में बड़ा सैन्य एक्शन, अल बायदा और तािज़ इलाकों में सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों को पीछे धकेला.

यमन में चल रहे संघर्ष के बीच सरकारी सुरक्षा बलों ने अल बायदा और तािज़ गवर्नरट में बड़ी सफलता हासिल की है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 7 सितंबर 2026 तक चले इन सैन्य अभियानों में सरकारी बलों ने हूती विद्रोहियों के कब्जे से कई रणनीतिक इलाकों को पूरी तरह से आजाद करा लिया है। इस कार्रवाई से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है और आम जनता ने भी चैन की सांस ली है।
अल बायदा और तािज़ में सरकारी बलों की बड़ी कार्रवाई
सेना की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, अल बायदा में चलाए गए विशेष ऑपरेशन के दौरान सरकारी नियंत्रण Haid Al Khazan, Al Fulaihan साइटों और Al Nasifah आइसोलेशन क्षेत्र तक पहुंच गया है। इस दौरान Dhi Amkhashab गांव को भी अपने कब्जे में ले लिया गया, जो कि इस आइसोलेशन जोन का सबसे पहला गांव है। वहीं दूसरी ओर, तािज़ के पश्चिमी हिस्से में स्थित Al Kadha फ्रंट पर भी सरकारी सैनिकों ने Naqil Al Kura और Jabal Al Kura जैसे अहम इलाकों को सुरक्षित कर लिया है।
हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले और वाहनों का नुकसान
इसी दिन चलाए गए व्यापक सैन्य अभियानों के तहत, सरकारी बलों ने हूती ठिकानों, उनके हथियारों और एक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को निशाना बनाकर कुल 13 हवाई हमले किए। ये हमले मुख्य रूप से Al Sharya, Dhi Na'em, Al Bayda और Al Sawadiyah जिलों में किए गए। इसके अलावा, तािज़ के Al Dhabab मोर्चे पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए घुसपैठ के प्रयास को भी सेना ने पूरी तरह नाकाम कर दिया। संयुक्त हवाई और मैदानी कार्रवाई के दौरान पश्चिमी तािज़ में हूती सेना के कुल 24 सैन्य वाहन पूरी तरह तबाह कर दिए गए, जिनमें से 21 वाहन Al Rabiei क्षेत्र में और 3 वाहन Al Kadha में नष्ट किए गए। तािज़ और Al Hudaydah में हुई अन्य झड़पों के दौरान 20 से अधिक हूती लड़ाके या तो मारे गए या फिर गंभीर रूप से घायल हो गए।
अन्य क्षेत्रों में भी जारी रहा सैन्य अभियान
सरकारी बलों की यह कार्रवाई सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि दक्षिणी अल Hudaydah, मारिब के पश्चिमी बाहरी इलाकों, Al Labanat और Al Alam में भी हवाई और जमीनी हमले जारी रहे। इसके साथ ही, सरकारी सैनिकों ने अल जोफ गवर्नरट स्थित Al Labanat शिविर में भी प्रवेश कर लिया, जिससे हूती मिलिशिया को अपने कई सैनिकों और भारी मात्रा में साजो-सामान का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ये तमाम सैन्य गतिविधियां जुलाई 2026 से लगातार बढ़ते जा रहे तनाव और संघर्षों के दौर का एक बड़ा हिस्सा हैं।