यमन में बड़ा तनाव, मोखा एयरपोर्ट के पास हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर सरकारी सेना और सऊदी अरब का हमला.

यमन में हालात एक बार फिर से बहुत ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं क्योंकि वहां की सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई ठीक उस समय सामने आई है जब मोखा एयरपोर्ट के आसपास हूती लड़ाके बड़ी संख्या में इकट्ठा हो रहे थे और इस इलाके में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा था। अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से जो युद्धविराम समझौता हुआ था, उसके बाद से मौजूदा संघर्ष को सबसे बड़ा और खतरनाक टकराव माना जा रहा है। आम लोगों के लिए यह खबर काफी चिंताजनक है क्योंकि इससे पूरे इलाके की शांति खतरे में पड़ गई है और युद्ध के बादल एक बार फिर से मंडराने लगे हैं।
सऊदी अरब की तरफ से किए गए हवाई हमले
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर 2026 को यमन की सैन्य ताकतों ने मोखा शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित मोखा एयरपोर्ट के पास हूती मिलिशिया के जमावड़े को निशाना बनाकर सख्त सैन्य कार्रवाई की। इस बीच, सऊदी अरब की सेना ने भी इसी दिन मोखा एयरपोर्ट पर दो हवाई हमले किए। सना में हूती संचालित रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि देश के कई अन्य प्रांतों जैसे कि Taiz, Hodeidah, Jawf और Marib में कुल 40 सऊदी हवाई हमले किए गए हैं। हूती विद्रोहियों ने 10 सितंबर 2026 को अपना हमला तेज करते हुए लाल सागर के तटीय इलाकों और रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद से हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं।
बाबर-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और द्वीपों पर कब्जा
हूती विद्रोहियों की इस आक्रामक कार्रवाई की वजह से उन्होंने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए हैं और जुझार द्वीप के साथ-साथ मयून यानी पेरिम और हनिश द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यमन नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस के नेता Tareq Saleh ने इस बात की पुष्टि की है कि हूती विद्रोहियों के बहुत भारी हमलों के कारण उनकी इकाइयों को मोखा से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। दूसरी तरफ, यमन के प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष Rashad al-Alimi ने साफ शब्दों में कहा है कि तटीय इलाकों पर देश के सरकारी नियंत्रण को दोबारा बहाल करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकता है और यह अंतरराष्ट्रीय हित से भी जुड़ा हुआ है।
हूती प्रवक्ता का दावा और अंतरराष्ट्रीय चिंता
हूती संगठन के प्रवक्ता Mohammed Abdul Salam ने इन तटीय सैन्य अभियानों को पूरी तरह से रक्षात्मक बताया है और दावा किया है कि लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब में समुद्री नौवहन अभी भी पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि, किंग्ज़ कॉलेज लंदन के सुरक्षा विशेषज्ञ Andreas Krieg ने चेतावनी देते हुए कहा है कि तटीय इलाकों पर हूती नियंत्रण से समुद्री जहाजों पर खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और विद्रोही ठिकानों को खत्म करने के चल रहे प्रयासों में भारी रुकावट आएगी। बढ़ते संघर्ष को देखते हुए यूनाइटेड किंगडम समेत कई देशों ने बाब-अल-मंदेब मार्ग की सुरक्षा के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संपर्क किया है ताकि वैश्विक व्यापार और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके।