यमन सरकार का बड़ा कदम, पश्चिमी तट से पीछे हटने के बाद फिर से जंग की तैयारी शुरू

यमन में चल रहे संघर्ष के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ सरकारी सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए फिर से जंग की तैयारी शुरू कर दी है। देश के पश्चिमी तट से सैनिकों के पीछे हटने के बाद अब सरकार ने अपनी ताकतों को दोबारा संगठित करना शुरू कर दिया है ताकि मैदान में मजबूती से वापसी की जा सके। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम जनता और इस इलाके से जुड़े लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं क्योंकि यह विवाद लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है।
सुल्तान अल-अरादा का बड़ा बयान
यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सदस्य और मारिब के गवर्नर Sultan al-Arada ने 13 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की कि सरकारी बल फिर से युद्ध के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहे हैं। सरकारी चैनल सबा टीवी से बातचीत करते हुए उन्होंने हौथी विद्रोहियों के हाथों हुए हालिया नुकसान को बेहद दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सीधे तौर पर हौथी विद्रोहियों पर शांति प्रक्रिया में बाधा डालने और यमन सरकार को एक बार फिर से युद्ध का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर करने का गंभीर आरोप लगाया है।
Tareq Saleh का नया निर्देश और वैकल्पिक कमान केंद्र
सेना को फिर से एकजुट करने की यह पहल प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के उपाध्यक्ष Tareq Saleh द्वारा जारी किए गए एक विशेष निर्देश के बाद शुरू हुई है। उन्होंने 10 सितंबर 2026 को आदेश दिया था कि पश्चिमी तट पर मौजूद सभी सशस्त्र बल अपनी रैंक को फिर से संगठित करें और एक नया वैकल्पिक कमान केंद्र स्थापित करें। सालेह ने हाल ही में हुए सैनिकों के नुकसान के लिए एक हौथी आक्रामक अभियान को जिम्मेदार ठहराया और दावा किया कि इसके पीछे ईरान का हाथ था। इस बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए नेशनल डिफेंस Council ने 12 सितंबर 2026 को पश्चिमी ताएज में एक किल ज़ोन घोषित कर दिया जिसमें रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह मोखा के आसपास के इलाके भी शामिल हैं।
सैन्य मोर्चे पर काउंटर-स्ट्राइक और नए फ्रंट
सैन्य प्रवक्ता Majid al-Nuzaili ने जानकारी दी कि सरकारी बलों ने 12 सितंबर 2026 को मोखा और ताएज में हौथी विद्रोहियों के ठिकानों और उनके सैन्य उपकरणों पर जोरदार जवाबी हमले किए। इसी दिन मारिब में एक सैन्य समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अल-अरादा ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में राज्य के नियंत्रण को फिर से बहाल करना और हौथी कब्जे वाले सभी इलाकों को आजाद कराना है। केवल तटीय इलाकों तक ही नहीं बल्कि सरकार ने अल-जौफ, मारिब और अल-बायदा में भी नए ऑपरेशनल मोर्चे खोल दिए हैं। इसके अलावा तेल समृद्ध मारिब प्रांत में सरकारी सेना ने 12 सितंबर 2026 को हौफियों के एक बड़े हमले को सफलतापूर्वक नाकाम भी कर दिया।
सऊदी अरब तक पहुंचा तनाव
इस संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों की सीमाओं तक भी महसूस किया जाने लगा है। 13 सितंबर 2026 को सीमा पार से हुए तनाव के दौरान हौथी विद्रोहियों द्वारा दागा गया एक प्रोजेक्टाइल सऊदी अरब के दक्षिणी जाज़ान क्षेत्र में जा गिरा जिससे एक मस्जिद को भारी नुकसान पहुंचा और दो लोग घायल हो गए। इस तरह की घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि यह संकट केवल यमन तक सीमित नहीं है बल्कि इससे आसपास के पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।