यमन में फिर भड़की जंग, सरकार ने राजधानी Sanaa पर कब्जे के लिए शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान.

Praggya Singh sabal8 September 20263 min read22 viewsYemen
यमन में फिर भड़की जंग, सरकार ने राजधानी Sanaa पर कब्जे के लिए शुरू किया बड़ा सैन्य अभियान.

यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने आधिकारिक तौर पर राजधानी Sanaa को हूती विद्रोहियों के कब्जे से वापस लेने के लिए एक बड़े सैन्य काउंटरऑफेंसिव यानी जवाबी हमले की शुरुआत कर दी है। 8 सितंबर 2026 को शुरू हुए इस सैन्य अभियान की घोषणा सरकारी टीवी चैनल Yemen TV पर उप रक्षा मंत्री मेजर जनरल Samir Al-Sabri द्वारा की गई, जबकि सेना के प्रवक्ता Majid al-Nuzaili ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ कहा कि Sanaa को दोबारा हासिल करना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन Rashad al-Alimi ने भी यह कसम खाई है कि देश भर में सरकारी सत्ता की बहाली तक सेना का यह ऑपरेशन लगातार जारी रहेगा।

2022 के संघर्ष विराम का आधिकारिक अंत

European Institute of Peace के सीनियर येमन एडवाइजर Hisham Al-Omeisy ने Al Jazeera English को बताया कि सरकार की तरफ से उठाया गया यह कदम साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्ष विराम यानी ट्रूस का पूरी तरह से अंत माना जा रहा है। देश में हिंसा की यह आग पहले ही जुलाई 2026 में भड़क चुकी थी, जब Sanaa में एक अनधिकृत ईरानी विमान के आने के बाद एयरपोर्ट पर हमले हुए और हूती विद्रोहियों ने भी इसका बदला लेने के लिए कार्रवाई की थी। इस नए संघर्ष के बाद से आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में चिंता का माहौल बन गया है और लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।

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संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता

यमन में हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत Hans Grundberg ने 7 और 8 सितंबर 2026 को गहरी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यह खतरनाक टकराव आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है और देश एक बार फिर बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध की तरफ बढ़ सकता है। यूएन के इस दूत ने सभी पक्षों से तुरंत हथियार डालने और हिंसा रोकने की अपील की है ताकि साल 2022 के समझौते से बची-कुची स्थिरता को बचाया जा सके। युद्ध के मैदान से मिल रही ताजा खबरों के मुताबिक, सरकारी बलों ने अल-जावफ, अल-बायदा, ताइज और अल-हुदैदाह गवर्नरट के कई इलाकों में अहम बढ़त हासिल की है।

मैदान पर सेना की बढ़त और पुराना संघर्ष

सरकार समर्थक जायंट्स ब्रिगेड ने अल-बायदा में कई जरूरी और रणनीतिक ठिकानों पर अपना कब्जा जमा लिया है, जबकि यमन की सेना ने भी दुश्मनों के ठिकानों पर टारगेटेड एयरस्ट्राइक यानी हवाई हमले किए हैं। यह ताजा हिंसा उस खूनी संघर्ष के ठीक बाद शुरू हुई है जिसमें 8 सितंबर से पहले के चार दिनों में ही हूती विद्रोहियों के एक हमले के दौरान 300 से ज्यादा लड़ाके मारे गए थे। हूती विद्रोही बंदरगाह शहर मोखा को अलग-थलग करने और रणनीतिक रूप से बेहद अहम Bab al-Mandab जलडमरूमध्य को डराने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में सरकार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है।

क्षेत्रीय तनाव और व्यापक भू-राजनीतिक असर

लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों और साल 2023 के आखिर से इस्राइल-गाजा संघर्ष से जुड़े क्षेत्रीय हमलों की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए 8 सितंबर 2026 को Chatham House द्वारा एक ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया था, जिसमें इन तमाम क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे यमन के मौजूदा हालात पूरे मध्य प्रदेश और खाड़ी देशों के लिए नए सुरक्षा खतरे पैदा कर रहे हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों और कामगारों की मुश्किलें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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