यमन के नेता रशाद अल-अलिमी की बड़ी चेतावनी, हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मदब जलडमरूमध्य को बनाया निशाना

Nura Basta10 September 20262 min read37 viewsYemen
यमन के नेता रशाद अल-अलिमी की बड़ी चेतावनी, हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मदब जलडमरूमध्य को बनाया निशाना

यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष Rashad Al-Alimi ने गुरुवार को एक बेहद अहम बयान देते हुए कहा कि यमन सरकार देश भर में अपनी सत्ता बहाल करने के लिए पूरी तरह से काम कर रही है। उन्होंने यूरोपीय संघ के राजदूत Patrick Simonnet और डच राजदूत Jeannette Seppen के साथ एक बैठक के दौरान यह बात कही। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि हूती विद्रोही Bab Al-Mandab Strait को होर्मुज जलडमरूमध्य की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यमन को ईरान की राजनीतिक चालों का साधन नहीं बनने दिया जाएगा।

हूतियों की हरकतों से आम लोग हो रहे हैं परेशान

अल-अलिमी ने यूरोपीय राजदूतों को हाल ही में हूती विद्रोहियों द्वारा की गई हिंसा और तनाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ताएज प्रांत के पश्चिमी तट के मोर्चों और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास लगातार हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने कभी भी इस हिंसा की शुरुआत नहीं की, बल्कि हूती विद्रोही लगातार आम नागरिकों, विस्थापितों के शिविरों, मोखा बंदरगाह और जरूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। यमन के तटीय इलाकों और समुद्री सीमाओं की रक्षा करना देश की संप्रभुता के साथ-साथ दुनिया भर के व्यापार, ऊर्जा और खाने-पीने की सप्लाई के लिए बहुत जरूरी समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखना है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इन रणनीतिक समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के लिए यमन सरकार की मदद की जानी चाहिए।

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ईरान पर साधा निशाना और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार

इस पूरे मामले को ईरान की क्षेत्रीय रणनीति से जोड़ते हुए अल-अलिमी ने आरोप लगाया कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय दबाव का बोझ क्षेत्रीय देशों पर डाल रहा है। ईरान सप्लाई चेन और ऊर्जा सुविधाओं को खतरे में डालकर हालात खराब कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा कि वे इस तनाव के लिए दोनों पक्षों को बराबर जिम्मेदार न ठहराएं, बल्कि सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाए। इसके अलावा, उन्होंने यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से यह अपील की कि वे देश में विस्थापित हुए लोगों की मदद करें और स्थानीय प्रशासन का समर्थन करें।

अल-अलिमी ने हथियारों और सैन्य तकनीक की तस्करी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को पूरी तरह से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने अंत में यह बात भी कही कि यमन के राज्य के लिए आर्थिक और मानवीय सहायता बहुत जरूरी है। जब तक मिलिशिया के पास हथियार हैं और उनके पास युद्ध छेड़ने की ताकत है, तब तक देश में शांति स्थायी नहीं हो सकती है।

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