यमन के राष्ट्रपति रशाद अल-अलिमी ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जनजातियों से की अपील

यमन के प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलिमी ने हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों और जनजातियों से एक बहुत बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग हूती समूह के चल रहे संघर्षों और लड़ाइयों में अपने बच्चों को बिल्कुल भी शामिल न करें। यह बयान 4 सितंबर 2026 को यमन के सशस्त्र बलों के मीडिया सेंटर द्वारा जारी किया गया था, जिसमें स्थानीय लोगों को चेतावनी दी गई थी कि वे अपने बेटों को किसी ऐसे प्रोजेक्ट का ईंधन न बनने दें जो यमन देश के हित में नहीं है।
ईरान के एजेंडे पर उठाए सवाल
अल-अलिमी ने आगे कहा कि यमन के युवाओं को मौत के मुंह में झोंका जा रहा है जो कि सीधे तौर पर ईरान के शासन के एजेंडे और क्षेत्र में उसकी विनाशकारी योजनाओं को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। यह ताजा अपील देश में हाल ही में बढ़ी हुई सैन्य गतिविधियों के बाद सामने आई है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम यमन में हूती लड़ाकों और सरकारी सेना के बीच भयंकर झड़पें हुई थीं। सऊदी अरब के समर्थन से सरकारी सैनिकों ने हूती संगठन के नए हमलों के बाद कड़े जवाबी हमले किए थे। यमन के मीडिया ने ताइज़ के पश्चिम में हुई गोलीबारी में पाँच हूती लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की थी।
सशस्त्र बलों का आधिकारिक बयान
यमन सशस्त्र बलों के प्रवक्ता कर्नल मजिद अब्दुल्ला अल-नुजैली ने इन सभी घटनाओं को बार-बार होने वाले हूती आतंकवादी हमले बताया जो सीधे तौर पर आम नागरिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं। ऐसा लगता है कि इस ईरान समर्थित समूह के भीतर अंदरूनी कलह और फूट चल रही है। खबरों के अनुसार, नेतृत्व की वफादारी और योग्यता को लेकर चिंताओं के चलते हूती गुट ने 3 सितंबर को अपनी तीसरी और सातवीं सैन्य रीजन के कमांडरों को बदल दिया था। रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स इन अंदरूनी विवादों को संभालने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ, हूतियों ने अपनी आक्रामक बयानबाजी को और तेज कर दिया है और सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा करने के साथ ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही है।
अल-अलिमी का कड़ा रुख और पुरानी घोषणाएं
अल-अलिमी पिछले कुछ महीनों से इस मिलिशिया समूह के खिलाफ लगातार और सख्त रुख अपनाए हुए हैं। बीते 14 अगस्त 2026 को उन्होंने हूतियों के हथियार डालने और एक राजनीतिक दल बनाने के प्रस्ताव को अपना आखिरी संदेश बताया था और किसी भी तरह के अस्थायी संघर्षविराम को साफ खारिज कर दिया था। उनका यह कड़ा रुख 21 जुलाई 2026 से लगातार जारी है जब उन्होंने स्पष्ट किया था कि देश में सशस्त्र समूहों के लिए कोई भी भविष्य नहीं बचा है। इसके अलावा 10 अगस्त को उन्होंने कहा था कि हूती हमलों का बिना किसी परिणाम के दौर अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और यमन सरकार अब किसी भी मिलिशिया को सैन्य संघर्ष की शर्तें तय नहीं करने देगी।