यूसुफ मुनय्येर ने 9/11 के बाद अमरीका और इसराइल के रिश्तों पर रखी अपनी बात, अल जजीरा में छपा लेख.

अमरीका और इसराइल के रिश्तों को लेकर एक बड़ा लेख सामने आया है जिसमें 9/11 की घटना के बाद के हालातों पर खुलकर बात की गई है। इस लेख को अरब सेंटर वाशिंगटन डीसी के सीनियर फेलो यूसुफ मुनय्येर ने लिखा है और यह 11 सितंबर 2026 को अल जजीरा इंग्लिश में प्रकाशित हुआ था। इस लेख में उन्होंने बताया है कि कैसे 9/11 के हमलों के बाद फैली इस्लामफोबिया की सोच और अमरीका तथा इसराइल की रणनीतिक साझेदारी आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। यूसुफ मुनय्येर जो कि यूएस कैंपेन फॉर पैलेस्टाइनियन राइट्स के पूर्व कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं, उनका कहना है कि उस समय अमरीका पर हुए हमले के बाद वहां का माहौल ऐसा बना दिया गया था जिसमें इस्लाम विरोधी कहानियों और नैरेटिव को बहुत आसानी से जगह मिल गई।
9/11 के पच्चीस साल बाद भी जारी है उस दौर की राजनीति
लेख में इस बात का जिक्र किया गया है कि 9/11 की घटना को पूरे 25 साल बीत चुके हैं लेकिन उस दौर के 'आतंक के खिलाफ युद्ध' यानी 'वार ऑन टेरर' की सोच आज भी खत्म नहीं हुई है। बेंजामिन नेतन्याहू की शुरुआती प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए लेख में बताया गया है कि इसराइली नेता ने तब ही यह अनुमान लगा लिया था कि यह त्रासदी दोनों देशों के बीच के बंधन को और ज्यादा मजबूत करेगी। इस पूरी प्रक्रिया में कई ऐसे चेहरे सामने आए जिन्होंने इस तरह के नैरेटिव को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई। इनमें डेविड होरोविट्ज शामिल हैं जिन्होंने फलस्तीनियों को आतंकवाद से जोड़ा, डैनियल पाइल्स जिन्होंने मुस्लिम संगठनों को मिलिटेंट बताया और स्टीवन इमर्सन जिन्होंने घुसपैठ के सिद्धांतों को लोकप्रिय बनाया। इसके अलावा ब्रिजेट गेब्रियल ने इस्लामवाद को एक सभ्यतागत खतरे के रूप में पेश किया और डेविड येरुशल्मी ने इस दायरे को शरिया कानून और मुस्लिम राजनीतिक प्रभाव तक बढ़ा दिया।
भू-राजनीतिक और घरेलू स्तर पर पड़े गंभीर असर
इस लेख में यह भी बताया गया है कि इन विचारों और नीतियों की वजह से राजनीति और समाज पर बहुत गहरे असर पड़े हैं। इसके कारण दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान बहुत ज्यादा बढ़ गया, इसराइल को अमरीका से मिलने वाली वित्तीय मदद में भारी बढ़ोतरी हुई और आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल फलस्तीनी समर्थकों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए किया जाने लगा। यूसुफ मुनय्येर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए ईरान के साथ चल रहे मौजूदा संकट का भी जिक्र किया है जो एक गहरी दलदल जैसा बन चुका है और जिसकी वजह से अमरीका को 100 अरब डॉलर से ज्यादा का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस पच्चीसवीं बरसी के मौके पर द डेली स्टार ने दुश्मनों को पैदा करने की प्रक्रिया पर रिपोर्ट छापी है और द न्यू अरब ने बड़े पैमाने पर निगरानी यानी मास सर्विलांस के फैलने पर बात की है। इसके साथ ही लॉस एंजिल्स टाइम्स में भी अमरीकी राजनीतिक माहौल में इस्लामफोबिया और यहूदी विरोध के विकास पर लगातार चर्चा हो रही है।